Heart-Touching Poem on Life in Hindi/ कड़वा सच बयां करती जीवन पर कविता – असीम दुःख व विश्वासघात के कारण कई बार व्यक्ति पूरी तरह बर्बाद हो जाता है|
साथ ही खुद को मृत के समान मानने लगता है| वह अर्द्ध- जीवात्मा बन जाता है| ऐसी ही कठोर मनःस्थिति को अभिव्यक्त करती कविता है - संशय पूर्ण जीवन|
संशय-पूर्ण जीवन
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जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
झूठ का यहाँ कारोबार है,
सच से नहीं सरोकार है|
बिकता है सब कुछ आज यहाँ,
कुछ भी कर लो जाओगे कहाँ?
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
गैरों की अब कौन कहे?
अपना कल रहे न रहे|
पैसा बोलता है यहाँ पर,
ईमान नहीं रहा यहाँ पर|
सामने लोग हँसी करते हैं,
कमर में छुरी रखते हैं|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
जहाँ भी तुम जाओगे,
अमन चैन नहीं पाओगे|
चहुँ ओर है भ्रष्टाचार,
ख़त्म हो चुका लोकाचार|
नैतिक बातें सभी करते हैं,
चलने से सभी डरते हैं|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
डिग्री तक सिमट गयी है शिक्षा,
लेने की अब नहीं है इच्छा|
डिग्री से बनाया मैंने नाव है,
यही सबसे बड़ा बना घाव है|
एक बच्चे को दिया वो कश्ती,
साथ ही मिट गयी वो हस्ती|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
“जिससे” तुम्हे हो प्यार की आशा,
शायद वो तेरी जान का प्यासा|
नहीं सोचो आ जाएँ वो काश!
नहीं रखो तुम उनसे आस|
अपनों से लगता अब डर,
घर भी नहीं रहा अब घर|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
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जीते जी मर गया हूँ मैं,
नहीं पता अब कौन हूँ मैं?
नहीं किसी का यहाँ है साथ,
चहुँ ओर है रात ही रात|
आदि, अंत सब दर्शन है,
दुनिया बस आकर्षण है|
दुनिया बस आकर्षण है|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?
***कृष्ण कुमार कैवल्य***
Heart-Touching Poem on Life in Hindi/ कड़वा-सच बयां करती जीवन पर कविता से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ –
संशय – आशंका, अनिश्चितता|
मनःस्थिति – मानसिक स्थिति|
कसौटी – मानक, मापदंड|
सरोकार – रिश्ता, वास्ता, संबंध|
लोकाचार – लोकनीति, आचार|
कश्ती – नाव|
हस्ती – अस्तित्व, विद्यमानता|
चलते चलते -
दोस्तों, प्रस्तुत कविता निराशा पूर्ण जीवन का आभास कराता है| परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य ऐसा सोचने लगे| क्योंकि ज़िंदगी में दुःख व सुख एक शास्वत सत्य है| इसे समान रुप से स्वीकार कर जीना चाहिए| हम जिन पर विश्वास करते हैं, उन्हीं में से किसी एक-दो से हमें विश्वासघात मिलता है| ऐसा होने का कारण है – लोगों के अलग-अलग आंतरिक गुणों का होना| और ये आतंरिक गुण शिक्षा, संस्कार, आचार-व्यवहार, नैतिकता, चरित्रबल आदि के आधार पर विकसित होते हैं| अतः हमें शांत-चित्त एवं विवेकी होकर जीवन जीना चाहिए तथा ‘जीओ और जीनों दो‘ में विश्वास रखना चाहिए|
धन्यवाद्| 🙏
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