Heart-Touching Poem on Life in Hindi | कड़वा-सच बयां करती जीवन पर कविता

Heart-Touching Poem on Life in Hindi | कड़वा सच बयां करती जीवन पर कविता  – असीम दुःख व विश्वासघात के कारण कई बार व्यक्ति पूरी तरह बर्बाद हो जाता है| 

साथ ही खुद को मृत के समान मानने लगता है| वह अर्द्ध- जीवात्मा बन जाता है| ऐसी ही कठोर मनःस्थिति को अभिव्यक्त करती कविता है - संशय पूर्ण जीवन|


संशय-पूर्ण जीवन
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जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?

 

A person covering their face, symbolizing doubt, fear, uncertainty and inner conflict
 Image by Daniel Reche from Pixabay


झूठ का यहाँ कारोबार है,

सच से नहीं सरोकार है|
बिकता है सब कुछ आज यहाँ,
कुछ भी कर लो जाओगे कहाँ?
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?


गैरों की अब कौन कहे?
अपना कल रहे न रहे|
पैसा बोलता है यहाँ पर,
ईमान नहीं रहा यहाँ पर|
सामने लोग हँसी करते हैं,
कमर में छुरी रखते हैं|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?


जहाँ भी तुम जाओगे,
अमन चैन नहीं पाओगे|
चहुँ ओर है भ्रष्टाचार,
ख़त्म हो चुका लोकाचार|
नैतिक बातें सभी करते हैं,
चलने से सभी डरते हैं|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?


A disappointed person covering their face and looking upward, symbolizing uncertainty, shattered  hopes and the struggle of an educated person in life
 Image by StockSnap from Pixabay


डिग्री तक सिमट गयी है शिक्षा,
लेने की अब नहीं है इच्छा|
डिग्री से बनाया मैंने नाव है,
यही सबसे बड़ा बना घाव है|
एक बच्चे को दिया वो कश्ती,
साथ ही मिट गयी वो हस्ती|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?


“जिससे” तुम्हे हो प्यार की आशा,
शायद वो तेरी जान का प्यासा|
नहीं सोचो आ जाएँ वो काश!
नहीं रखो तुम उनसे आस|
अपनों से लगता अब डर,
घर भी नहीं रहा अब घर|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?


Read Heart-Touching poem – प्राइवेट नौकरी


जीते जी मर गया हूँ मैं,
नहीं पता अब कौन हूँ मैं?
नहीं किसी का यहाँ है साथ,
चहुँ ओर है रात ही रात|
आदि, अंत सब दर्शन है,
दुनिया बस आकर्षण है|
दुनिया बस आकर्षण है|
जीवन संशय से है भरा,
कसौटी पर कौन है खरा?

    ***कृष्ण कुमार कैवल्य***

 

Heart-Touching Poem on Life in Hindi | कड़वा-सच बयां करती जीवन पर कविता से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ –

संशय –  आशंका, अनिश्चितता|
मनःस्थिति – मानसिक स्थिति|
कसौटी – मानक, मापदंड|
सरोकार – रिश्ता, वास्ता, संबंध|
लोकाचार – लोकनीति, आचार|
कश्ती – नाव|
हस्ती – अस्तित्व, विद्यमानता|


चलते चलते -

दोस्तों, प्रस्तुत कविता निराशा पूर्ण जीवन का आभास कराता है| परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य ऐसा सोचने लगे| क्योंकि ज़िंदगी में दुःख व सुख एक शास्वत सत्य है| इसे समान रुप से स्वीकार कर जीना चाहिए| हम जिन पर विश्वास करते हैं, उन्हीं में से किसी एक-दो से हमें विश्वासघात मिलता है| ऐसा होने का कारण है – लोगों के अलग-अलग आंतरिक गुणों का होना| और ये आतंरिक गुण शिक्षा, संस्कार, आचार-व्यवहार, नैतिकता, चरित्रबल आदि के आधार पर विकसित होते हैं| अतः हमें शांत-चित्त एवं विवेकी होकर जीवन जीना चाहिए तथा ‘जीओ और जीनों दो‘ में विश्वास रखना चाहिए|

धन्यवाद्| 🙏

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