ऋतुराज वसंत:आगमन बहार का | Short-Poem on Spring Season - जब कुदरत अपने पुराने पत्तों को त्याग कर नये रंग-बिरंगे कोमल पत्तों से सराबोर हो जाता है तो यह वसंत ऋतु ही होता है|
ऋतुराज न केवल प्रकृति में बदलाव लाता है बल्कि हमारे जीवन में नवीन संचार व खुशियाँ भी लेकर आता है| यह हमारी उम्मीदों में नयी जान फूंकता है|
वसंत को एक उत्सव के रूप में पिरोते हुए प्रस्तुत है मेरी एक छोटी कविता|
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वसंत
थोड़ी सी ठंड थोड़ी सी गर्मी,
न मौसम प्रचंड बल्कि नरमी।
हवाओं में ख़ुशबू सुमन ही सुमन,
सभी के खिल उठते हैं तन-मन।
Also read another poem - "लौट चलें कुदरत की ओर"
कोयल की कूक, भवरों का गान,
है इस मौसम की अपनी ही शान।
इसमें न पूर्ण विराम, न ही हलन्त,
हवाओं संग उड़ते जाओ ये है वसंत।
ये है वसंत, ये है वसंत, है ये वसंत।।
- कृष्ण कुमार कैवल्य।
ऋतुराज वसंत:आगमन बहार का | Short-Poem on Spring Season से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ
* ऋतुराज - बसंत ऋतु का अन्य नाम|
* सराबोर - लबरेज, भरा हुआ, लबालब, भरा-पूरा|
* सुमन - फूल, कुसुम (flower)|
इसमें न पूर्ण विराम, न ही हलन्त - यह पंक्ति प्रतीकात्मक है| इसका भाव यह है कि वसंत ऋतु में किसी भी तरह के ठहराव की गुंजाईश नहीं है| आनंद विभोर कर देने वाले इस मौसम में अपनी उड़ान भरते जाएं| पूरी ऊर्जा व मनोयोग से इस मधुमास में अपने कार्यों, इच्छाओं, अभिलाषाओं को पूरा करें|
नोट -
दोस्तों, कई वाक्य ऐसे होते हैं जिनके शब्दार्थ कुछ और होते हैं, जबकि भावार्थ कुछ और| इसलिए हमें किसी रचना ख़ासकर काव्य रचना को बड़े ध्यान से पढ़ना चाहिए| ताकि सही अर्थ को समझा जा सके|
धन्यवाद्|

2 टिप्पणियाँ
Sundar laghu kavita.
जवाब देंहटाएंMadhu Kiran.
धन्यवाद्|
जवाब देंहटाएंदोस्तों,
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