Heavy School Bag Poem in Hindi | 'भारी बस्ता'

Heavy School Bag Poem in Hindi | 'भारी बस्ता' - आज की शिक्षा-व्यवस्था के एक पहलू भारी बस्ते को रेखांकित करती कविता है|

बचपन बहुत ही प्यारा होता है| परन्तु यह भी सच है कि इसी समय बच्चे अपनी पढ़ाई भी शुरु करते हैं| इसके लिए अब भारी-भरकम बैग यानी बस्ता भी उनके साथ जुड़ जाता है| 
जहाँ बच्चों को निश्चिंत और पुष्पित-पल्लवित जिंदगी मिलनी चाहिए; वहां उन्हें भारी बस्ते के बोझ तले दबा दिया जाता है| यह अतिरिक्त अध्ययन सामग्री उनके शारीरिक-मानसिक अवस्था को बहुत प्रभावित करती है|
इस  कविता के माध्यम से मैं बच्चों के अनकहे दर्द को उभारते हुए सरकार, विद्यालय-प्रबंधन, अभिभावकों और दबाव समूहों से आग्रह करता हूँ कि उक्त सम्बन्ध में प्रभावशाली व ठोस रास्ता निकालें| ताकि बच्चों को उनका बचपन सच में  मिल सके| 
साथ ही यह कविता बच्चों के लिए एक ऐसी शिक्षा-व्यवस्था की कल्पना करती है, जहाँ बच्चों को खिलखिलाता बचपन मिले, वे स्वस्थ रहें और अपने सपनों को साकार करते हुए देश का नाम रौशन कर सकें|

Image generated by AI (Gemini)

कविता  -  'भारी बस्ता'

 

{बच्चे जो अभी चलना हैं सीखते,

भारी बस्ते उनके कंधे पर दिखते|}2

देख काफ़ी खुश होते अभिभावक,

हैं पर ये बच्चों के कंधे पर पावक।

 

 आगे चलकर कई रोग सताते,

हम उनकी आयु हैं घटाते।

बस्ता बहुत हल्का हो जाता काश!

होता उनका फिर सारा आकाश।

 

यदि बोझ घट जाए बस्ते का,

दर्द भी घट जाएगा बच्चे का।

नन्हे से कंधे बहुत गए हैं झूक,

आख़िर हम क्यों गए हैं चूक?

 

Also read Motivational Poem - 'मैं हूँ कौन'?


मैकाले की गुलाम शिक्षा-व्यवस्था,

बच्चों की हालत हो गई खस्ता।

मातृभाषा क्यों न बहुत बढ़े?

संग अंग्रेजी उन्हें क्यों न पढ़ें?

 

समुचित शिक्षा हो चहुं ओर,

नैतिकता पर हो क्यों न जोर।

किंतु कंधे जो खुले ऊंचे रहेंगे,

सफल जीवन की कथा कहेंगे।


  विद्यालय कुछ ऐसी नीति अपनाएं,

बच्चे न पुस्तक स्कूल ले जाएं।

पाठशाला प्रदान करे उन्हें किताबें,

आएंगी तब अनगिनत खिताबें।

 

बच्चे हर किताब का ख़ूब करें रसपान,

होते पास घर की पुस्तक का करें दान।

फिर आगे के बच्चे इनसे पढ़ते रहेंगे,

और भविष्य अपना स्वयं गढ़ते रहेंगे।


Image generated by AI (Gemini)

 

करबद्ध प्रार्थना मेरी है शासन से,

उठ जाएं आप अब भी आसन से।

बच्चों के हित में करें कुछ ख़ास,

आपसे आज मेरी है ये आस।

आपसे आज मेरी है ये आस।

-       कृष्ण कुमार कैवल्य।

 

 Heavy School Bag Poem in Hindi | 'भारी बस्ता' से सम्बंधित शब्दार्थ/भावार्थ -

  • पहलू -दृष्टिकोण, पक्ष, तरफ, दिशा|
  • पुष्पित-पल्लवित - फलना-फूलना, उन्मुक्त वातावरण में बढ़ना, विकसित होना, हरा-भरा होना|
  • पावक - आग, अग्नि ( इस कविता में इसका अर्थ दर्द, दुःख, तकलीफ के अर्थ में )|
  • खस्ता - ख़राब, बदहाल, जर्जर, टुटा-फूटा|
  • करबद्ध -हाथ जोड़कर, प्रणाम की मुद्रा|

 Heavy School Bag Poem in Hindi | 'भारी बस्ता' से जुडी कुछ बातें -

दोस्तों,  मैं  यहाँ यह कहना चाहता हूँ कि कृपया  बच्चों को खुल कर जीने दें|  उनके कंधों पर बोझ डालने का समय बचपन कदापि नहीं है| और न ही उनके मन पर किसी तरह का बोझ डाला जाए| मेरा मानना है कि बचपन सबसे प्यारा समय होता है| इसे प्यार, प्रेरणा, आनंद, वात्सल्य जैसे  ईश्वरीय तत्व चाहिए| ताकि वे जीवन में महानता के शिखर पर पहुँच सकें|
धन्यवाद्|

 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ