Cosmetic Surgery Ke Nuksan | Poetry on Inner Beauty

Cosmetic Surgery Ke Nuksan | Poetry on Inner Beauty  यह इंसान के ज्ञानचक्षु को खोलती व भौतिक और आत्मिक विकास को रेखांकित करती कविता है|

सुन्दर दिखने की चाहत लोगों पर इतनी हावी हो गयी है कि इंसान इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है| इस हेतु वे अपनी प्रकृति-प्रदत्त सुन्दर काया के साथ काफ़ी छेड़छाड़ कर रहे हैं|

यह कविता सुन्दरता की अंधी दौड़ व इसके दुष्परिणाम को रेखांकित करती है| साथ ही यह भी समझाती है कि हम इस प्रकृति की सर्वोत्तम कृति हैं| आज जरुरत है संतुलित समझ की| इसलिए हर पहलुओं पर विचार कर कोई कदम उठाएं|


 



  कॉस्मेटिक सर्जरी बनाम आतंरिक सुन्दरता


कॉस्मेटिक सर्जरी कराकर,

होती सुंदर दिखने की चाहत।

खुली की खुली रह जाती आंखें,

होता इंसान बहुत ही आहत।

 

 कभी किसी का अंधा होना,

आंखों से पानी का बहना।

कभी नाक का टेढ़ा होना,

रक्तस्राव का संयोग भी होना।

 

सर्जरी की लत, हताशा का भाव,

अंगों का सुजन, स्थायी निशान|

अपेक्षाओं का टूटना या अन्य लक्षण,

संकट में आ जाती है पहचान|


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दवा के दुष्परिणाम के कारण,

होता स्ट्रोक, फेफड़ों का रोग|

संक्रमण, हेमटोमा, सेरोमा का डर,

या दिल के मरीज बन जाते लोग|

 

 कई बार बहुत दर्द को सहना,

अंधी दौड़ में बहते रहना।

सुंदर, सुंदर और भी सुंदर,

दिवा-स्वप्न में खोए रहना।


 




 साल दर साल सर्जरी कराना,

करना खर्च बेतहाशा पैसा।

आजीवन रुलाता ग़लत शल्य-क्रिया,

सुंदर दिखने का नशा ये कैसा?

 

 विशेषज्ञ से ही सर्जरी कराओ,

अपनी जान अवश्य बचाओ।

पर बचना चाहते इस दर्द-खर्च से,

तो सही दिनचर्या अपनाओ।

 

 प्रकृति के बीच रहने की आदत,

कर कुदरत की सच्ची इबादत।

आहार, विहार, विचार मूल है,

कर  ले खुद की तू हिफाज़त।

 

 दुनिया के मायाजाल में न पड़ तू,

दूजे की देखादेखी न कर तू।

अपने अंतःकरण की आवाज़ पर,

खुशियां जीवन में स्वयं ही भर तू।

 

न कमतर आंक कभी भी खुद को,

तू जैसा है है बहुत ही सुंदर।

ज्ञान का सागर पियो रोज,

ईश्वर है हर इंसान के अंदर।

है ईश्वर कण-कण  के अंदर।

है ईश्वर कण-कण  के अंदर।।

-          कृष्ण कुमार कैवल्य|


 

Cosmetic Surgery Ke Nuksan | Poetry on Inner Beauty  से सम्बंधित शब्दार्थ/भावार्थ –

 Ø  ज्ञानचक्षु –  ज्ञान दृष्टि, अंतर्दृष्टि, ज्ञान की आँखें|

Ø  हेमटोमा, सेरोमा – प्लास्टिक सर्जरी से सम्बंधित बीमारियाँ|

Ø  दिवास्वप्न – दिन के सपने|

Ø  शख्सियत -  व्यक्तित्व|

 

 Cosmetic Surgery Ke Nuksan | Poetry on Inner Beauty  से सम्बंधित कुछ गंभीर बातें-

मैं यहाँ एक सरल किन्तु गंभीर बात कहना चाहता हूँ| ईश्वर ने हमें जैसा भी बनाया है; बहुत सुन्दर बनाया है| हम लोग जैसे भी हैं, बहुत अच्छे हैं| अपने ज्ञान, बुद्धि, विवेक से हम खुद की ही नहीं अपितु समूचे देश व संसार को सुन्दर बना सकते हैं|

 इस धरा पर सैकड़ों महान शख्सियत पैदा लिए जो भले ही बहुत खूबसूरत व आकर्षक काया के धनी नहीं थे, परन्तु अपने कर्म से दुनिया को आलोकित कर गए| और हम उन्हें महान लोगों की श्रेणी में रखते हैं एवं उन जैसा बनने का सपना देखते हैं| 

ऐसे कुछ महान लोगों के उदाहरण हैं- कौटिल्य, सम्राट अशोक, डॉक्टर ए. पी.जे. अब्दुल कलाम, अकबर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, मुंशी प्रेमचंद, लाल बहादुर शास्त्री, सुकरात, इमैनुअल कांट, लिओ टॉलस्टॉय, जोसेफ़ पुलित्ज़र, अब्राहम लिंकन, आइन्स्टीन, स्टीफन हॉकिन्स, न्यूटन, एडिसन, एडम स्मिथ, नेपोलियन बोनापार्ट, आदि|

कहा भी गया है – जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि| जरुरत है सही दृष्टिकोण की|

 धन्यवाद्|


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