ऋतुराज वसंत:आगमन बहार का | Short-Poem on Spring Season - जब कुदरत अपने पुराने पत्तों को त्याग कर नये रंग-बिरंगे कोमल पत्तों से सराबोर हो जाता है तो यह वसंत ऋतु ही होता है|
ऋतुराज न केवल प्रकृति में बदलाव लाता है बल्कि हमारे जीवन में नवीन संचार व खुशियाँ भी लेकर आता है| यह हमारी उम्मीदों में नयी जान फूंकता है|
वसंत को एक उत्सव के रूप में पिरोते हुए प्रस्तुत है मेरी एक छोटी कविता|
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वसंत
थोड़ी सी ठंड थोड़ी सी गर्मी,
न मौसम प्रचंड बल्कि नरमी।
हवाओं में ख़ुशबू सुमन ही सुमन,
सभी के खिल उठते हैं तन-मन।
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कोयल की कूक, भवरों का गान,
है इस मौसम की अपनी ही शान।
इसमें न पूर्ण विराम, न ही हलन्त,
हवाओं संग उड़ते जाओ ये है वसंत।
ये है वसंत, ये है वसंत, है ये वसंत।।
- कृष्ण कुमार कैवल्य।
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