Song on Religion Vs Humanity: "ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु"

 Song on Religion Vs Humanity: "ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु" - यह गीत एक प्रार्थना भी है जो सम्पूर्ण मानवता को समर्पित है | 

 आज पूरे विश्व में खून-ख़राबा, धर्म के नाम पर नरसंहार आम बात है| जबकि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं| धिक्कार है ऐसी कलुसित मानसिकता का जो समाज को खंड-खंड में बाँट रहा है| सभी धर्म रास्तों की तरह हैं जो एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं| परम तत्व एक ही है और उसी से सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण हुआ है| धर्म का काम है इंसान को इंसान से जोड़ना| न कि तोड़ना| 



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गीत- "ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु"


नहीं मांगता उससे भी मैं,

जो देता है सबको।

नहीं मांगता उससे भी मैं,

जो देता है सबको।

सखा-भाव रखता हूं दिल में,

करता प्रेम हूं रब को।

सखा-भाव रखता हूं दिल में,

करता प्रेम हूं रब को।

पूजता हूं मैं सबको,

पूजता हूं मैं सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

हां पूजता हूं मैं सबको।

 

 

जो भी नाम लें वह तो एक है,

वही देखता सबको।

जो भी नाम लें वह तो एक है,

वही देखता सबको।

क्यों लड़ते आपस में बंदे,

जाना वहीं है सबको।

क्यों लड़ते आपस में बंदे,

जाना वहीं है सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

पूजता हूं मैं सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

हां,पूजता हूं मैं सबको।

 

 

पंथ के नाम पे झगड़े रोज,

बर्बाद कर रहा सबको।

पंथ के नाम पे झगड़े रोज,

बर्बाद कर रहा सबको।

ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु,

लगता अच्छा है लब को।

ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु,

लगता अच्छा है लब को।

पूजता हूं मैं सबको,

पूजता हूं मैं सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

हां पूजता हूं मैं सबको।



 

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क्या तेरा क्या मेरा करता?

अधिकार है सबको।

क्या तेरा क्या मेरा करता?

अधिकार है सबको।

किसी का हक नहीं छीनना है,

हिसाब देना है सबको।

किसी का हक नहीं छीनना है,

हिसाब देना है सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

पूजता हूं मैं सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

हां पूजता हूं मैं सबको।


 

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कुछ नहीं अंतर है इनमें,

क्यों दिखता नहीं ये सबको।

कुछ नहीं अंतर है इनमें,

क्यों दिखता नहीं ये सबको।

अंतर्मन से धूल हटा,

सच दिख जाएगा सबको।

अंतर्मन से धूल हटा,

सच दिख जाएगा सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

पूजता हूं मैं सबको।

पूजता हूं मैं सबको,

हां पूजता हूं मैं सबको।

- कृष्ण कुमार कैवल्य।



 Song on Religion Vs Humanity: "ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु" से संबंधित  शब्दार्थ/भावार्थ -


  • कलुषित-     मैला, दूषित, गंदा|
  • अंतर्मन -     अंतरात्मा|
  • सखा भाव - मित्रभाव, दोस्त की तरह समझना| यह मित्र के लिए सर्वस्व समर्पित करने का भाव भी होता है|
  • निकृष्ट     -   घटिया, निम्न दर्जे का|

 

  Song on Religion Vs Humanity: "ईश्वर, गॉड, रब, वाहेगुरु" से संबंधित कुछ बातें - 


जो धर्म हिंसा के मार्ग पर ले जाता हो, मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ बाकि निकृष्ट हैं ऐसी अवधारणा पर चलता हो; वह धर्म नहीं हो सकता| याद रखें धर्म आदमी के लिए बना है| न कि आदमी धर्म के लिए| परन्तु दुर्भाग्य से आदमी को आदमी धर्म के नाम पर काट रहा है|

मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है| यदि सम्पूर्ण दुनिया इंसानियत को ही अपना धर्म मन ले तो कम से कम धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा समाप्त हो जाएगी|

प्रस्तुत गीत विभिन्न सभ्यताओं, संस्कृतियों व विश्वासों के बीच सेतु बन सके; इसी कामना के साथ आपका - कृष्ण कुमार कैवल्य|

धन्यवाद|



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