Poem on Sparrow in Hindi: "कहाँ गई वो गौरैया?”

 

Poem on Sparrow in Hindi: "कहाँ गई वो गौरैया?” नन्हीं जान गौरैया के बिना सुने हो चुके आँगन के दर्द को गहराई से बयां करती है|


हमारे आँगन को अपनी प्यारी चहचहाहट से भर देने वाली गौरैया आज कहाँ चली गयी है? ये

 वही गौरैया है जो अहले सुबह हमें अपनी मधुर आवाज़ से जगाया करती थी|


अब तो लोग कथित तौर पर अधिक बुद्धिजीवी हो गये हैं और कंक्रीट के जंगलों में रहने लगे

 हैं| मनुष्य की ग़लत अंतहीन चाहतों और अंधाधुंध वृक्षों की कटाई ने पारिस्थिकी व

 पर्यावरण को तहस-नहस कर दिया है| इस भयंकर असंतुलित विकास ने जीवन को जीने

 लायक ही नहीं छोड़ा है|


दूसरी ओर हम मनुष्यों से अभिन्न रूप से जुड़े रहने वाले पक्षीगण ख़ासकर गौरैया तो विलुप्त-

प्राय ही हो चली हैं| लगभग अधिकांश लोगों के आंगन व चहारदीवारी इनके बिना सुने हो

 चलें हैं|


उन मौन बसेरों में अब कभी-कभार भूले-भटके कोई गौरैया तिनकों की तलाश में ग़लती से

 आ जाती है| गौरैया के कई पहलुओं को छूती यह कविता हमें बहुत कुछ सोचने को मजबूर

 करती है|


कुछ बेहतरी की उम्मीद में प्रस्तुत है यह कविता - Poem on Sparrow in Hindi: "कहाँ गई वो

 गौरैया?”



कविता - "कहाँ गई वो गौरैया?”


चिड़ियों में बड़ी प्यारी चिड़िया,
वो तो है गौरैया।


इक्का दुक्का दिख जाती पर,

जल्द विलुप्त होगी गौरैया।



Photo by Lidong on Unsplash



कंक्रीट के जंगल अत्यधिक बन रहे,
आख़िर रहेगी कहां गौरैया?



लाखों पेड़ रोज कट रहे,
नीड़ रखेगी कहाँ गौरैया?



पुस्तकों में रह जाएगी,
याद उसकी जो है गौरैया।



मनाते रहो विश्व गौरैया दिवस,
ये खानापूर्ति देख रही गौरैया।



संवेदना क्यों मर गई इंसान की,
क्या कर सकती बेचारी गौरैया?


कीटनाशकों के प्रयोग से,

बहुत मार रही हैं गौरैया|



मोबाईल टावरों के रेडिएशन  से,

कैसे बचेंगी गौरैया?


मारते झपट्टा बिल्लीकुत्ते,
जब धरा पर बैठती गौरैया।



जाए आख़िर तो जाए कहां?
मजबूरलाचार गौरैया।



अधिकाधिक पेड़ों को बचाएं,
बच जाएगी प्यारी गौरैया।



उसके  शरण की करो व्यवस्था,
आंगन में आए जब गौरैया।



क्या अंतर्मन के स्वच्छ आईने में,
दिखती नहीं गौरैया?



क्या होता नहीं धिक्कार महसूस?
बिल्कुल  ख़त्म हो चली गौरैया।



बनोगे कितना स्वार्थी अब तुम,
सब कुछ देख रही गौरैया।



पक्षियों को क्या दर्द नहीं होता?
जानती नहीं क्या गौरैया?




Photo by Shohidul Alam on Unsplash




सोचो एक बार सच्चे मन से,
आईना दिखा देगी गौरैया।



छत पर अथवा बालकनी में.

अब भी आएंगी गौरैया|



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दाना पानी के इंतजाम से,

झूम उठेगी गौरैया|



कृत्रिम घोंसला यदि बना दें,

उसमें भी बसेंगे गौरैया। 



आधिकारिक यदि पौधे लगाएं

अस्तित्व में रहेंगी  गौरैया।




निर्माण करो उन्मुक्त-माहौल का,
तब फले 
-फूलेगी गौरैया।



तुम इंसान हो इंसान ही रहो,
बस चाहती यही गौरैया 
|
हाँ ,चाहती यही गौरैया ||

    -  कृष्ण कुमार कैवल्य।



Poem on Sparrow in Hindi: "कहाँ गई वो गौरैया?” से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ -


कंक्रीट के जंगल - चारों ओर बहुमंजिला भवन या  बिल्डिंग ही बिल्डिंग, जहाँ कुदरती

 वातावरण, हरियालीपार्क, वनस्पतियां न के बराबर हो|

► चहारदीवारी        - बाउंड्री, प्राचीर, घर के चारों ओर बनाया गया घेरा, परकोटा

► विलुप्त                  - गायब, समाप्त या ख़त्म

► खानापूर्ति             औपचारिकता, केवल नाम मात्र के लिए

                                        दिखावा भर के लिए|

 उन्मुक्त                - खुला वातावरण, बंधन- मुक्त, स्वतंत्र, आज़ाद|



Poem on Sparrow in Hindi: "कहाँ गई वो गौरैया?” से संबंधित दो बातें -





दोस्तों, ये प्यारे परिंदे जिस दिन अंतिम रूप से चहचहाना बंद कर देंगे, उस दिन समझिए

 मानवता भी मर चुकी होगी| कहीं ऐसा न हो कि हम डायनासोर समेत अनेक विलुप्त जीवों

 की तरह गौरैया को भी पुस्तकों में या फल-सब्जियों में देख कर खुश होंईश्वर न करें या

 कुदरत न करे कि वह दिन कभी आए, ऐसी मेरी कामना है|


गौरैया बिहार और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की राजकीय पक्षी है|

समूचा जगत गौरैया को बचने के लिए कृतसंकल्प है| इस हेतु प्रति वर्ष 20/03 (बीस मार्च) को

 विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है|


याद रखें, भले हम सब अपने को काफ़ी ऊँचाई पर खड़ा मान लें, किन्तु बड़ा प्रश्न भी हमारे

 सामने खड़ा है| यानी तरक्की है पर मधुरता नहीं, हवा है पर प्राकृतिक संगीत नहीं|

ख़ासकर शहरों व महानगरों में|

कृपया कर सोचें और समुचित कदम उठायें|

धन्यवाद्|🙏






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