Poem on Politics in Hindi: सियासी जुमलों पर कविता - आज की नैतिकताविहीन व भ्रष्ट राजनीति पर केन्द्रित कविता है|
हम सब चुनाव के पहले विभिन्न प्रत्याशियों द्वारा घोषणाएं व वादे सुनते रहते हैं। सभी उम्मीदवार दावा करते हैं कि वे ऐसे-ऐसे कदम उठाएंगे, जिससे जनता की सारी तकलीफ़ें दूर हो जाएंगी। परंतु वे अपनी बातों पर कितना खरा उतरते हैं, ये आप सबको पता है।
कुछ एक प्रतिबद्ध और वचन के धनी प्रत्याशियों को छोड़ दें तो बाकी सब आश्वासन के लड्डू खूब देते हैं। और बाद में उनके सारे वचन हवा हवाई हो जाते हैं। यदि अगली बार वे न भी जीतें तो भी इतनी काली कमाई जमा कर लेते हैं कि उन्हें भविष्य की चिंता ख़त्म हो जाती है।
और यदि बहुत ज़्यादा दबाव पड़ने पर उनके ख़िलाफ़ जांच भी की गई तो जांच इतने साल चलती है कि तब तक वे मर चुके होते हैं।
दरअसल सालों साल जांच चलती नहीं बल्कि चलवाई जाती है। तारीख पे तारीख बढ़वाई जाती है। इन नेताओं को बचाने के इस खेल में पुलिस, न्यायपालिका, नौकरशाह, उनके समर्थक और काॅरपोरेट किसी न किसी रूप में, जाने अथवा अनजाने, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहते हैं।
कविता - "सियासी जुमले"
आपके क्षेत्र का मैं प्रत्याशी,
ये कर रहा हूं नाद।
आपके क्षेत्र का मैं प्रत्याशी,
ये कर रहा हूं नाद।
घोषित वादे करूंगा पूरा,
लोग करेंगे इस पे संवाद।
स्पष्ट बहुमत बस दे दे आप,
दो-तिहाई को कर दें पार।
निःसंदेह करूंगा मैं आपके,
सपनों को साकार।
जीत जाने पर निश्चित ही,
होता रहूंगा दो-चार।
स्वयं मैं सबसे मिलता रहूंगा,
दूंगा विकास को धार।
स्वास्थ्य, शिक्षा, लाइट, दूंगा,
दूंगा सड़क और नाली।
आश्वस्त रहें बेशक आप सब,
न वचन जाएगा खाली।
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दरवाजा घर का खुला रहेगा,
मैं बहुत प्रतिबद्ध प्रत्याशी।
जन-सेवा मेरी अभिलाषा,
जाति न काबा, काशी।
हर समाज में चलता रहेगा,
वाद और प्रतिवाद।
आप सब कृपया मुझे जीताएं,
रखें इस अवश्य ही याद।
रखें इसे अवश्य ही याद।।
परन्तु ये नेता कभी नहीं कहेंगे कि -
समय, परिस्थितियां सामान्य रहने पर भी,
गर पूरा न किया मैं काम।
समय, परिस्थितियां सामान्य रहने पर भी,
गर पूरा न किया मैं काम।
तब जो भी सजा आप दें मुझको,
मैं भूगतूंगा अंजाम।
वचनों पे गर मैं नहीं खरा उतरता,
तब करें मेरा बहिष्कारl
कर दें त्याग आजीवन मेरा,
ये कुल संवाद का सार,
ये कुल संवाद का सार।।
दोस्तों, काव्य रूप में आखिर में मैं यही कहूंगा कि -
वैसे नेता को नकारें,
जिसमें भरा हो खोट।
वैसे नेता को नकारें,
जिसमें भरा है खोट।
लालच में कभी ना आएं,
चाहे बरसे कितने भी नोट।
ग़लत से न करें समझौता,
करें भ्रष्टाचार पे चोट।
अपने अंतर्मन की आवाज़ पर,
आप करें अवश्य ही वोट।
आप करें अवश्य ही वोट।।
- कृष्ण कुमार कैवल्य।
Poem on Politics in Hindi: सियासी जुमलों पर कविता से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ -
* प्रत्याशी - उम्मीदवार (Candidate)|
* नाद - आवाज़, ध्वनि|
* अंजाम - परिणाम, नतीजा, फल,परिणति|
* मद्देनज़र - ध्यान में रखते हुए, दृष्टिगत करते हुए|
* कृतार्थ - आभारी, संतुष्ट, धन्य महसूस करना|
Poem on Politics in Hindi: सियासी जुमलों पर कविता से संबंधित कुछ खास बातें-
तुलसीदास जी ने कहा था - “समरथ को नहीं दोष गोसाईं।”
अर्थात समर्थवान का कोई दोष नहीं होता।
l
दूसरे अर्थो में हम यह कह सकते हैं कि -
“जिसकी लाठी उसकी भैंस” शक्तिशाली या बलवान व्यक्ति की ही जीत होती है (Might is Right)l
यही सच समाज का आज आईना बन चुका है। ज़रूरत है इस सूरत को बदलने की। इसी के मद्देनजर मैंने उपरोक्त कविता लिखी है। इस कविता के माध्यम से यदि मैं नागरिक समाज में थोड़ा भी बदलाव ला सका तो अपने आप को कृतार्थ समझूंगा।
धन्यवाद।


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