Motivational- Inspirational Poem on Teachers’ Day in Hindi

 

Motivational- Inspirational Poem on Teachers’ Day in Hindi- शिक्षकों के प्रति समर्पित कविता है|

 

पूरे विश्व में शिक्षक का पद सर्वाधिक सम्माननीय होता है| चाहे वह डॉक्टर हो या इंजीनियर, वैज्ञानिक हो या प्रबंधक या फिर कुछ और| वो शिक्षक ही होता है; जो उनको शिक्षित करता है और उनको उस काबिल बनाता है|

 

 कविता - शिक्षक दिवस

 

 

ईश, गुरु और मात-पिता में,

गुरू का दर्जा सर्वश्रेष्ठ है।

सच के धरातल पर देखें तो 

बात ये बिल्कुल ही यथेष्ठ है।





 

क्या भला क्या बूरा है होता.

गुरु बताते इन बातों को।

शिष्य को देते चैन की नींद वे,

खुद जगते हैं वे रातों को।

 

छात्रों के हर प्रश्न का उत्तर,

देते हैं अति सरल रूप से ।

उनके अंतःकरण जगाकर,

निकालते उनको अंध-कूप से।

 

बारिश से भीगे चेहरे पर,

आँसू को पहचानते हैं वे ।

छात्र- संतुष्टि परम-धर्म,

इस बात को मानते हैं वे।

 

प्रेम, समर्पण त्याग-भाव से,

शिक्षण कार्य करते हैं गुरु|

दुर्गुण का करते हैं अंत वे,

प्रज्ञा - धारा होता है शुरू।

 

पर टूट रहा गुरू शिष्य भाव-अब

मूल्य भी कुछ गिरा है ज़रूर ।

प्रेम में भी आयी है कमी और

थोड़ा बढ़ गया है गुरूर।

 

शिक्षा सेवा, व्यवसाय नहीं है।

गुरु भी समझें अवश्य इसको।

दें निःशुल्क ज्ञान अब उनको,

ज़रूरत इसकी है जिसको।

 

बच्चों की मुद्रा को समझें,

मुद्रा की भाषा बाद में |

शिक्षक कुछ ऐसा कर जाएँ,

सदा-सदा रहें याद में।




 


अपने अंतर्मन में झांके हम,

पाक रखें यदि धरम-ईमान |

जाएँ पहुँच सर्वोच्च बिन्दू पर,

होगा शून्य सारा अभिमान|

 

सबसे बड़ी पूँजी है शिक्षा,

इसे चुरा सकता है कौन?

महिमा विद्या की है अनंत,

इसके आगे सब कुछ है गौण।

 

हम विद्यार्थी निष्ठा-भाव से,

करें गुरू का सम्मान।

गुरू की गुरुता सबसे बड़ी,

इसका हम सबको हो भान|


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आज शिक्षक दिवस के अवसर पर,

गुरू को शत-शत बार प्रणाम।

ज्ञान- शिखर पर बढ़ते रहें हम,

बढ़ता जाए देश का नाम।

बढ़ता जाए देश का नाम||

- कृष्ण कुमार कैवल्य।

 

Motivational- Inspirational Poem on Teachers’ Day in Hindi से जुड़े शब्दार्थ/भावार्थ-

मूल्य- रकम, पैसा के अर्थ में|

मूल्य – मानवता के गुण (नैतिकता, चरित्रबल, प्रेम, दया, क्षमा आदि का भाव)|

अंध-कूप – अँधेरा, अज्ञानता, भंवर|

गुरुर- अहंकार, घमंड|

गौण- अप्रधान, मूल अर्थ से भिन्न|

भान – अहसास, ज्ञान, बोध, चमक, प्रकाश|

परिप्रेक्ष्य – अर्थ, सन्दर्भ|

प्रतिविम्बित – दिखना, छाया का आना/पड़ना|

अलख जगाना – जोत जगाना, ज्ञान-प्रकाश फैलाना, जागरूकता फैलाने के अर्थ में|

 

 

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Motivational- Inspirational Poem on Teachers’ Day in Hindi से सम्बंधित कुछ ख़ास बातें-

 

भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो शिक्षक का दर्जा माता-पिता एवं ईश्वर से भी ऊँचा है| शिष्य अगर शिक्षक से आगे चला जाए; तो शिक्षक को जलन नहीं बल्कि बहुत गर्व होता है| इसमें गुरु का बड़प्पन, त्याग व समर्पण भाव और शिष्य की मेहनत प्रतिविम्बित होती है|

 

आज इस भौतिकवादी युग में गुरु-शिष्य परंपरा में काफी गिरावट आई है| ये काफी चिंता का विषय है| इस पर विचार मंथन करने एवं समाधान तलाशने की अत्यंत आवश्यकता है| और इसका सबसे बड़ा समाधान यह है कि गुरु और शिष्य बस अपना-अपना धर्म ईमानदारी से निभाते चले जाएँ|

भूतपूर्व राष्ट्रपति, शिक्षाविद, विद्वान् व दार्शनिक भारत-रत्न श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर मनाया जाने वाला पर्व “शिक्षक दिवस” भारत के लिए अत्यंत गौरव का विषय है|

 

अंततः ये कहा जा सकता है कि गुरु के सम्मान में मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस कहीं न कहीं हर विद्यार्थी के दिल में गुरु के प्रति गुरुता का अलख जगाता है| मेरी कामना है कि यह भाव सदा बरकरार रहे|

धन्यवाद|

 

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