Poem on Goddess Durga in Hindi : "माॅं दुर्गा पर सर्वश्रेष्ठ कविता" - प्रस्तुत कविता में माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान किया गया है|
यह कविता न सिर्फ़ आध्यात्मिक है बल्कि मनोबल, आत्मबल बढ़ाने
वाली भी है| भगवती दुर्गा की आराधना समस्त मनोकामनाओं को
पूर्ण करती है| उनके बारे में मैंने कुछ लिखने का एक छोटा सा
प्रयास किया है|
कविता – माँ दुर्गा
पर्वतराज हिमालय की पुत्री,
युद्ध और त्याग की देवी।
शांति और साहस का स्वरूप,
सृष्टि की रचयिता माँ दुर्गा।
मातृत्व और
प्रेम का प्रतीक,
तपस्या और संयम
की देवी।
शाश्वत और
पवित्र स्वरूप।
भय का नाश करती
माँ दुर्गा।
सिद्धिदात्री,
मोक्षदात्री,
अद्वितीय,
न्यायकारी
जगदंबा।
समस्त कार्य
पूर्ण करने वाली,
हैं जगत जननी माँ दुर्गा।
आर्या, दुर्गा,
सती, साध्वी,
भवानी, आद्या, त्रिनेत्रा,
जया।
चंद्रघंटा,
कालरात्रि,
चामुंडा,
महिषासुरमर्दिनी
माँ दुर्गा।
स्कंदमाता,
सर्वज्ञ,
कात्यायनी।
परा शक्ति, अपरा
शक्ति,
नित्य, पुरातन,
महागौरी माँ दुर्गा।
निस्त्रैगुण्य,
जगत माता,
अपराजेय, मोक्षदायिनी|
भवप्रीता, भवमोचनी,
कमलारानी, शाकम्भरी माँ दुर्गा।
अंत किया
महिषासुर के पाप का।
नारी शक्ति की
पराकाष्ठा उनमें,
अनुपम, अविचल, अविनाशी मां
दुर्गा।
अनुपम, अविचल, अविनाशी माँ दुर्गा।।
-
कृष्ण कुमार कैवल्य।


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