Motivational Poem in Hindi | 'धूर्तों से सावधान!' आज की दुनिया की सच्चाई बयां करती कविता है।
आज कई लोगों के चेहरे दोमुहें हो गए हैं| अर्थात ऐसे लोगों के चेहरे बाहर से तो कुछ और होता है पर भीतर
से बिलकुल उलट| इस प्रकार के लोग समाज के लिए जहरीले सांप से भी अधिक खतरनाक होते हैं।
क्योंकि
विष धारण करने वाले सांप को तो हम प्रत्यक्ष
रूप से देखते हैं और सतर्क हो जाते हैं| परंतु ऐसे दोमुहें लोगों को तो हम पहचान ही नहीं पाते| और ऐसे दुष्ट कभी भी हमें अपना शिकार बना जाते हैं।
सांप
के काटे का तो इलाज हो जाता है, परंतु ऐसे खतरनाक लोग इस प्रकार डंसते हैं कि उनका इलाज
भी होना बड़ा मुश्किल हो जाता है| अर्थात इलाज करने का मौका भी वे नहीं देते।
दिल
का अच्छा व सच्चा होना बहुत अच्छी बात है| परंतु दुष्टों को पहचाने की कला भी हमें आनी
चाहिए। इसके लिए हमें अति विश्वास की पट्टी को अपने आंखों से हटाना होगा और दूरदर्शी
बना होगा| तभी हम नरपिशाचों के मायाजाल को तोड़ सकते हैं।
निम्नलिखित शब्दों के माध्यम से मैंने ज्ञान और प्रेरणा के बीज इस कविता में बोने का भरसक प्रयास किया है। इस काव्य के शब्द काफी गहरे हैं। आशा है इसे पढ़ने के बाद आपके दिलों में एक ज्योति अवश्य टिमटिमाएगी।
कविता - ‘धूर्तों से सावधान!’
Image by Flavio Botana from Pixabay
एक ही झूठ बार-बार बोलकर,
सच साबित कर दिया जाता है।
एक ही झूठ बार-बार बोलकर,
सच साबित कर दिया जाता है।
जाति, धर्म का विष घोलकर,
दिलों में नफ़रत भर दिया जाता है।
सभी ज्ञानी अच्छे नहीं होते,
नहीं होते सभी दिल के सच्चे।
सज्जन लोगों की बात तो छोड़ो,
धूर्त छोड़ते नहीं हों चाहे बच्चे।
सुंदर चेहरे पर मत जाना,
दिल के काले हैं बहुतेरे।
रक्त पीने को वे आतुर,
सपने ख़त्म कर देते तेरे।
क्या सोचना है लोगों को,
देते बांध सीमा बुरे व धूर्त।
उसी में ख़ूब चर्चा करवाते,
लगता होंगे तेरे सपने अब मूर्त।
अब इसी नशा वाले कुएं में,
फंस कर रह जाते हैं लोग।
उसी में ढूंढते अपनी आज़ादी,
पर बन जाते दुष्टों का भोग।
करो काम सोच-समझ कर वरना,
अजगर तुझे निगलने को तैयार।
तेरी दूरदर्शिता, संतुलित सोच,
जीवन में लाएगी अवश्य
बयार।
Image by StartupStockPhotos from Pixabay
मत कभी भी ध्यान दो उन पर,
वे
चीजें
जो हैं बेकार।
ज्ञान,
ध्यान व मौन रुपी मोती,
ले जाएंगे तुझे क्षितिज के पार।
Also Read Motivational & Spiritual Poem - 'मैं हूँ कौन'?
समझ सको तो समझ भी जाओ,
अपने विवेक से काम करो।
अंदर तेरे ब्रह्मांड छुपा,
खुद को इस सृष्टि के नाम करो।
अब भी कुछ अच्छा काम करो।
अब भी कुछ अच्छा काम करो।
-
कृष्ण
कुमार कैवल्य।
Motivational Poem in Hindi | 'धूर्तों से सावधान!' से सम्बंधित शब्दार्थ/भावार्थ -
- धूर्त - बुरे लोग, छली/कपटी लोग, मक्कार, धोखेबाज||
- आतुर - उत्सुक, व्याकुल, अधीर|
- मूर्त - ढांचागत, साकार रूप|
- बहुतेरे - बहुत से लोग, प्रचुर, अत्यधिक|
Motivational Poem in Hindi | 'धूर्तों से सावधान!' से सम्बंधित दो बातें -
प्रिया पाठकों! इस कविता को लिखने का मेरा मकसद बिल्कुल स्पष्ट व पवित्र है। और वह है आप सबको जागरूक करना, सचेत करना और गलत लोगों के शिकार होने से बचाना, न कि किसी की भावना को ठेस पहुंचाना।
समझदारी
और सतर्कता रूपी ढाल से खुद की रक्षा करें और कपटी लोगों के छल का जवाब देने में आप सक्षम बनें।
धन्यवाद।


0 टिप्पणियाँ
दोस्तों,
आपकी प्रतिक्रिया इस shabdsansar blog की साहित्यिक यात्रा की ऊर्जा है। कृपया टिप्पणी करते समय “Name/URL” विकल्प का चयन कर अपना नाम लिखें, ताकि संवाद आत्मीय और सम्मानपूर्ण बना रहे| आपकी प्रत्येक सार्थक टिप्पणी हमारे लिए अमूल्य है|
कभी तकनीकी समस्या आए, तो आप पेज को पुनः लोड करके इसका समाधान कर सकते हैं|
धन्यवाद्|