Heart-Touching Shayari for Friend in Hindi - मेरे दोस्त! एक भावनात्मक शायरी है|
यह एक निराश, परेशान और दिल से टूटे मित्र के हृदय में आशा, विश्वास का संचार करती शायरी है| दोस्तों, जीवन में दुःख और सुख आते रहेंगे| मिलना- बिछड़ना भी चलता रहेगा| यही जीवन चक्र है|
इसलिए हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि अपना कर्म करते हुए अपने जीवन को हम आनंद की स्थिति में रहकर जीयें| साथ ही अपने जीवन में सदा मध्यम मार्ग अपनाएं| ज़िंदगी जीने का नाम है| इसे बिताकर बर्बाद न करें|
मेरे दोस्त!
नूर बहुत छुपा रखे तुमने,
नहीं आता नज़र देखने वालों को।
नूर बहुत छुपा रखे तुमने,
नहीं आता नज़र देखने वालों को।
ये आंखें हैं उस पारखी की,
लीलाएं तुम्हारी जिसने देखी है।
हां! वो भी क्या वक्त था,
जब सारा समंदर तेरा था।
तू बेबाक और था दिल दरिया,
समा ये उस सनम ने देखी है।
कसूर नहीं था उन तितलियों का,
आखि़र फूल पर बैठी रहतीं कब तक?
आशियाना में तो जाना ही था उनको,
मजबूरियां उनकी तूने देखी है।
किया जो कुछ बहुत ही प्यारे थे,
पर उनके लिए बन गया सितम।
बहुत ही दर्द हुआ होगा उनको,
तड़प बहुत उनकी तूने देखी है।
किए थे तूने उन सब के लिए नेकी,
था नहीं दिल में छल-कपट कोई।
हिम्मत की कमी, कुछ खास मज़बूरी,
हालात तेरी मैंने यारा देखी है।
पर समय कहां रुकता है भाई,
लगातार ही ये चलता है।
बहुत पाया तू इल्म और उल्फत,
सारी कायनात ने इसे देखी है।
है तुम्हारी यही कमाई,
सबसे बड़ी है दौलत ये।
जो हो तुम आज अपनी बदौलत,
दुनिया! क्या ऐसी शख्सियत देखी है?
बहुत ही कम समय में यारा,
बहुत अधिक छोड़ दिया तूने।
है बहुत ही ख़ुशनसीब तू,
तस्वीर ज़मीर की तूने देखी है।
वरना करोड़ों हैं इस दुनिया में,
ज़मीर क्या चीज है पता नहीं।
ठगे जा रहे हैं खुद से खुद को,
बदहाली क्या ऐसी तूने देखी है?
माना आज कुछ कमियां हैं पर
ये जानता है वो भगवान-खुदा।
माना आज कुछ कमियां हैं पर
ये जानता है वो भगवान-खुदा।
हर ज़िम्मेदारी कैसे है निभाना,
तेरी अंतरात्मा ने इसे देखी है।
हर ज़िम्मेदारी कैसे है निभाना,
तेरी अंतरात्मा ने इसे देखी है।
- कृष्ण कुमार कैवल्य।
Heart-Touching Shayari for Friend in Hindi से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ-
* समा - विशालता, श्रेष्ठता,उच्चता। अन्य अर्थ- अध्यात्मिक यात्रा, सामानता, स्थिरता, शांत।
* नूर- रोशनी, प्रकाश, बहुत ही कीमती चीज, बहुत ही प्यारी चीज।
* आशियाना- घर, आवास, ठिकाना, आधार, गृहस्थ जीवन के अर्थ में भी।
* इल्म- ज्ञान, हुनर।
* कायनात- दुनिया, जहान, जग, सृष्टि, जगत, संसार।
* बदौलत - सहारे से, कृपा से, कारण से।
* शख्सियत - व्यक्तित्व।
* ज़मीर -अंतरात्मा, अंतर्मन।


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