दर्द भरी शायरी - "यादें" - किसी काल्पनिक नायक की ज़िंदगी का सम्पूर्ण फलसफ़ा है; जो अत्यंत पीड़ादायी है|
उक्त शायरी में शब्द सीमित एवं भावनाएं असीमित हैं| वैसे भी साहित्यिक रचना करते समय भावनाओं के सागर में उतरना पड़ता है| तब जाकर कहीं एक-दो मोती मिलते हैं|
मेरी हसरत
देखने की तुम्हें हसरत है बहुत,
एक बार ही आ जाते तुम काश!
देखने की तुम्हें हसरत है बहुत,
एक बार ही आ जाते तुम काश!
जीने की तनिक अब नहीं है चाहत,
ज़िंदगी मुकम्मिल बन गयी है लाश|
महाशून्य अपना ये जहाँ,
नहीं है अब मुझे किसी की तलाश|
महाशून्य अपना ये जहाँ,
नहीं है अब मुझे किसी की तलाश|
यूं तो महफ़िल है भरी-भरी,
पर दिखता ख़ाली ये सारा आकाश|
------------------
यादें
वक्त के साथ दर्द हो जाएगा कम,
कह कर यह बढ़ा दिया उसने गम|
अब आया बुलावा ‘उस दुनिया’ से,
बड़ी ख़ुशी से वहां चलें बसने हम|
बड़ा चैन बड़ी राहत है मिली,
नहीं देखेंगे वो सपने हम|
बड़ा चैन बड़ी राहत है मिली,
नहीं देखेंगे वो सपने हम|
उस कफ़न से आज आज़ादी मिली,
जिसे सालों पहले थे पहने हम|
उस कफ़न से आज आज़ादी मिली,
जिसे सालों पहले थे पहने हम|
- कृष्ण
कुमार कैवल्य|


0 टिप्पणियाँ
दोस्तों, अपना कमेंट करते समय कृपया अपना नाम और ईमेल आईडी अवश्य लिखें ताकि हम आपसे जुड़ सकें|
यदि आपको कमेंट करने में समस्या आ रही हो, तो कृपया सुनिश्चित करें कि आप अपने Google Account से लॉगिन हैं और आपके ब्राउज़र में Cookies Allow है| धन्यवाद|