Poem on Veer Bal-Diwas in Hindi

 

Poem on Veer Bal-Diwas in Hindi -  वीर बाल दिवस पर लिखी गयी एक अत्यंत संवेदनशील कविता है|

 इस कविता में यह दिखलाया गया है कि किस प्रकार गुरु गोविन्द सिंह के दोनों छोटे बच्चे बाबा जोरावर

सिंह और बाबा फतेह सिंह ने अत्याचारियों को आगे निर्भीक होकर उनकी सत्ता को चुनौती दी और अपने पिता की गरिमा, आन, बान, शान और स्वाभिमान को मरते दम तक बनाए रखा|

 यह कविता न्याय-अन्याय, पाप-पुण्य की एक अति गंभीर बानगी है| मनुष्य एक तरफ संसार का सर्वश्रष्ठ प्राणी है; तो वहीं दूसरी और इंसान से निकृष्ट प्राणी भी पूरी दुनिया में नहीं मिलेगा|

 उक्त कविता हर उस व्यक्ति को अन्दर तक सोचने को मजबूर कर देगा; जिसमें इन्सानियात है, संवेदनशीलता है|

 

कविता - वीर बाल दिवस


बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह,

गुरु गोविंद सिंह के बाल-गोपाल।

अपने रक्त से लिखा इतिहास,

बन गए वे जग में मिसाल।


 AI image of Baba Zorawar Singh ji
 and Baba Fateh Singh ji.

 

थी उम्र उनकी 9 साल, 7 साल,

बन गए बेमिसाल।

अन्याय के खिलाफ खड़े होकर,

दिखलाया व्यक्तित्व विशाल।


 

सरहिंद के नवाब वजीर खान ने,

उनको धोखे से बंदी बनाया।

स्वाभिमान और धर्म छोड़ने का,

बहुत दबाव डलवाया।

 

उस वजीर ने कचहरी का,

गेट बहुत किया छोटा।

साहिबज़ादे झुक जाएं,

ये सोच उसका था खोटा।

 

खुद्दारी का परिचय दे वीरों ने,

पहले पैर किया अंदर।

तब सिर को उन्होंने आगे बढ़ाया,

जवाब दिया अति सुंदर।

 

वाहेगुरु जी की खालसा,

वाहेगुरु जी की फतेह।

भय को मानो जीत लिया था,

नहीं था खुद पे कोई संदेह।

 

बीच कचहरी में वजीर के,

थे खड़े फौलादी वीर।

नंगी तलवारों के बीच भी,

वे बने धीर-गंभीर।

 

थी नन्ही उम्र गजब के हौसले,

देखा वो मध्यकाल।

बिरले मिलता देखने को,

अद्वितीय बालकाल।

 

थे निर्भय, प्रलोभन से दूर,

हर गलत को किया इंकार।

अत्याचारी वजीर खान के आगे,

अंततः मौत को किया स्वीकार|

 

हारकर पूछा वजीर खान "अगर,

छोड़ दें तो तुम क्या करोगे?

अपनी मंशा बतलाओ,

क्या आगे तुम लड़ोगे?

 

कहा तब बाल वीरों ने "हम

फिर फौज तैयार करेंगे।

चैन से नहीं बैठेंगे और

अन्याय के विरुद्ध लड़ेंगे।"

 

डर लालच हिला ना पाया,

जब स्वीकार किया इस्लाम।

चिनवाने लगा वजीर दीवारों में,

 होने लगी जीवन की शाम।

 

जब सिर तक दीवार उठवाया वजीर ने,

फिर पूछा उसने इरादा।

बाल वीरों ने पुनः वही कहा,

निभाया पिता का वादा।

 

अंत में बाबा जोरावर सिंह ने कहा-

इस दीवार के जवाब में हमने,

खड़ी की सत्य, धर्म की दीवार।

नहीं तोड़ तुम इसे पाओगे,

मानवता हमारा परिवार।

 

इसी बीच दीवार गिरी तो,

वीरों को खंजर मारा।

शहीद हो गए बाल - वीर,

गुंजा सत् श्री अकाल का नारा।

 

दीवार पुनः खड़ी करवाया,

पर मियाद इसकी बहुत कम थी।

सरहिंद जीत इसे सिखों ने गिराया,

किंतु आंखें बहुत ही नाम थीं।

 

बंदा बहादुर ने ले लिया,

बदला बाल-वीरों का।

सिख वीरों ने दिया जवाब,

हथियार, तलवार, तीरों का।



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चप्परचिड़ी के इस युद्ध में,

सिखों ने दिखाई शान।

सरहिंद को रौंदा ख़ूब फौज ने,

मारा गया वजीर खान।

 

सरहिंद कहलाया फतेहगढ़,

बना फतेहगढ़ खुशहाल।

सिखों ने पुनः प्रतिष्ठा पाई,

बुलंद हुआ इकबाल।

 

अपने कर्म से उन बाल वीरों ने,

स्थापित किया प्रतिमान।

अन्याय के आगे झुकने से,

बेहतर है देना बलिदान।

 

जाति, धर्म, पैसा आदि से,

ऊंचा उठता नहीं इंसान।

अपने अच्छे कर्मों से,

बनता वो जग में महान।

 

दादी की सीख सदा याद रखी,

पिता का मान बढ़ाया।

बलि-बेदी पर खुद की जान को,

उन्होंने था चढ़ाया।


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उसूलों की खातिर इतनी कम उम्र में,

गले से मौत को लगाया।

वीरता की अनुपम परिपाटी,

उन वीरों ने चलाया।

 

बाल वीर दिवस नहीं एक उत्सव,

है ये प्रतीक, वचन, संकल्प।

वीरता का नहीं इस दुनिया में,

है कोई भी विकल्प।

 

26 दिसंबर, 1705 का दिन,

सदा ही याद रहेगा।

साहिबजादों की कथा जग,

सदियों तक कहेगा।

 

न्याय-अन्याय, पाप- पुण्य के बीच,

जब तक धरती रहेगी।

न्याय-अन्याय, पाप- पुण्य के बीच,

जब तक धरती रहेगी।

तब तक इन बाल वीरों की,

कहानी कहती रहेगी।

तब तक इन बाल वीरों की,

कहानी कहती रहेगी।।

-कृष्ण कुमार कैवल्य।


Poem on Veer Bal-Diwas in Hindi  से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ- 

  • बानगी - नमूना|
  • निकृष्ट- नीच, अधम, घटिया, ख़राब|
  • बिरले - बहुत ही कम, कुछ, इने-गिने, शायद ही कभी|
  • मंशा  - इच्छा, इरादा, अभिप्राय, उद्देश्य|
  • दीवार में चिनवाना/चुनवाना- किसी व्यक्ति को जीवित ही ईंटों की दिवार के अन्दर करके मार डालना|  पूर्व  काल में अत्याचारी शासकों/नवाबों/सामंतों/अमीरों/सुल्तानों/बादशाहों द्वारा दी जाने वाली एक क्रूर सज़ा|
  •  होने लगी जीवन की शाम - मौत के समीप पहुंचना, मृत्यु निकट होना|
  • मियाद- अवधि, काल|
  • चप्परचिड़ी - पंजाब के मोहाली के पास स्थित एक स्थल| 
  • परिपाटी-  प्रथा, ढ़ंग, शैली|
  • वीर बाल-दिवस (Veer Bal-Diwas)  -   भारत सरकार ने 26 दिसंबर के दिन को गुरु गोविन्द सिंह के दोनों महान छोटे बच्चे बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत दिवस के रूप में  मनाने, स्मरण व नमन करने की पवित्र शुरुआत की| उक्त दिवस की शुरुआत सन 2022 से की गयी| 
धन्यवाद 🙏|

 

 

 

 

 

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