Motivational-Poem for children in Hindi

 

Motivational-Poem for children in Hindi – "मछली और इंसान” बच्चों के दिलों में उतर जाने वाली एक विचारशील कविता है| 

यह कविता मानवीय संवेदना को उभारते हुए जीवों के प्रति दया, प्रेम व  करुणा को जगाती है| जैसे हमें दर्द होता है; वैसे ही अन्य जीवों को भी दुःख-दर्द का अहसास होता है| चाहे वो मछली हो, पेड़-पौधे हों या कोई भी जानवर|

यदि बच्चों समेत किसी भी इंसान के अंतर्मन में यह कविता  उतर जाए, तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी| क्योंकि अंतरात्मा की आवाज़ सबसे बड़ी होती है| 

धन्यवाद|


Motivational-Poem for children in Hindi – 

"मछली और इंसान|


Image by Christel SAGNIEZ from Pixabay



बड़ी खुश होती है मछली,
शांत जल में दिखता जब भोजन।
बड़े प्यार से आती है,
और उसे खा जाती है।

खाते ही सब समझ जाती है,
अन्त-काल निकट पाती है।
दिया है किसी ने धोखा पर
नहीं कुछ वो कर पाती है।

स्वर-तंत्र न होने के कारण,
वह चीखती न चिल्लाती है।
हद से ज्यादा है वो तड़पती
और समीप मौत को पाती है।

छद्म-रूप में जीवन उसे मिलता,
बस कुछ देर के लिए ये होता है।
जैसे ही ग्राहक कोई आता,
मछुआरा काट उसे धोता है।



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इसलिए,

चिंता मत कर ओ बंदे तू,
तेरा मछुआरा भी आएगा।
तेरे भी प्राण वो हर कर,
साथ तुझे ले जाएगा।

कितने भी तू चीखे चिल्लाए,
कोई भी न बचा पाएगा।
जो भी अब तक किया है तूने,
अवश्य उसका फल पाएगा।

स्वर्ग, नरक सब है यहीं,
सारे हिसाब यहीं पाएगा।
जितना भी लूटा है अब तक,
सब छोड़ यहीं तू जाएगा।


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हो सके तो कुछ अच्छा कर ले,
बड़ा सुकून तू पाएगा।
अपना रूप दिल के आईने में,
तब तू धवल ही पाएगा।
उज्ज्वल ही तू पाएगा।
         - कृष्ण कुमार कैवल्य।


Motivational-Poem for children in Hindi – "मछली और इंसान” से जुड़े शब्दार्थ/भावार्थ

* अंतर्मन - अंतरात्मा|
* अन्तकाल - मृत्यु का समय|
* सुकून - चैन, आराम, शांति|
* धवल - उज्ज्वल, बेदाग़, निष्पाप, कलंकरहित|

 

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