Poem on Corrupt-Politician in Hindi

 
Poem on Corrupt-Politician in Hindi - "रुक जाओ भस्मासुर" एक जागरूकता पैदा करने वाली कविता है| 

अपने घर को सुधारने के बजाए जब कोई उसे और बिगाड़ने लगे और उसका ठिकरा अपने पड़ोसी पर फोड़ने लगे तो पड़ोसी को कैसा लगेगा, इसे कोई भी समझ सकता है| किसी भी समस्या का समाधान ईमानदारी से करना चाहिए न कि उस समस्या में ही अपनी रोटी सेंकनी शुरू कर देनी चाहिए| अन्यथा उसका प्रतिफल बहुत ही प्रतिकूल होता है| 

याद रहे इंसान को किसी भी हालत में इंसानियत का त्याग नहीं करना चाहिए| मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है|


कविता - "रुक जाओ भस्मासुर"


 Image by Kanenori from Pixabay


है पड़ोसी देश का एक शासक,

वह बन गया अब भस्मासुर

उसके मुल्क को किया हमने पैदा,

क्या है यही हमारा कसूर?

 

 सज्जन सा सुंदर वेश धारण कर,

वह दुर्जन बना उसका प्रधान।

खूब उत्पात मचा रहा वो,

जाना नहीं भारत को नादान।

 

फैला रहा नफ़रत का बीज और

कट्टरपंथ, जेहाद का नारा।

माहौल हो रहा अति उष्ण व

बढ़ा रहा हर रोज वो पारा।

 

नित दिन भारत की शराफ़त का,

उठा रहा नाजायज़ फ़ायदा।

कमजोर समझ रहा वो हमको,

भूल गया संस्कार, कायदा।


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संभल जाओ अब भी उत्पाती,

न लो सब्र का इम्तिहान ज्यादा,

न लगेगी देर इलाज करने में,

हो तुम बस शतरंज का प्यादा।

 

जिनके बल पर तुम कूद रहे हो,

उन्होंने किया था बलात.., अनाचार।

रखी थी हमने लाज तुम्हारी,

भूले तुम सब आचार-विचार?

 

तुम्हारे देश का था अंदरूनी मामला,

चुनी सरकार हुई अपदस्त।

पर उगल रहा आग हमारे ख़िलाफ

और कर रहा अपनों पे ही तू दस्त?

 

संभल गए जो अभी प्यारे तो,

हो जाएगा अब भी सब ठीक।

वरना जब गरजेगा भारत तब,

न ख़त्म होगी तुम्हारी चीख।

 

भागते-भागते तुम थक जाओगे,

जल, थल, नभ में हम ही हम।

और अंततः होगी तुम्हारी,

आंखें नम फिर बम और यम।

 

 सन् 71 से गत वर्ष तक,

आचार, विचार, व्यवहार सच्चा था।

हमारे लिए तुम पुत्र समान,

सब कुछ तो अच्छा ही अच्छा था।

 

कुछ मछलियां यदि सड़ जाएं तो,

पूरे तालाब को हैं कर देती गंदा।

है राजनीति विशुद्ध सेवा पर

बनाया तूने तिजारत, धंधा।


 Image by Niek Verlaan from Pixabay


नहीं बुरे  हैं लोग तेरे देश के,

तुने ख़ूब फैलाया  उन्माद।

गर सुधरे तो सब ठीक ही ठीक,

वरना होगा अनुनाद ही अनुनाद।

वरना होगा अनुनाद ही अनुनाद।

-कृष्ण कुमार कैवल्य।

 

Poem on Corrupt-Politician in Hindi - "रुक जाओ भस्मासुर" से संबंधित शब्दार्थ/ भावार्थ -

* अपनी रोटी सेंकना - अपना फ़ायदा देखना|

* अन्यथा - नहीं तो, वरना|

* प्रतिफल - परिणाम, अंजाम|

* प्रतिकूल - विपरीत, उलटा|

* अपदस्त - पद से हटाना|

* तिजारत - व्यापार|

* अनुनाद - अनुगूँज, प्रतिध्वनि (Echo)|

 

नोट - यह कविता दिसंबर, 2025 में तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को (बांग्ला देश -संबंधी) देखते हुए लिखी गयी|  

 

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