Short-Poem on Humanity in Hindi


Short-Poem on Humanity in Hindi - मनुष्य और पक्षियों को उद्धृत करते हुए इंसानियत पर लिखी गयी एक लघु कविता है| 

दुनिया का हर जीव प्यार को समझते हैं| परन्तु वो इंसान ही है जो प्यार को सर्वोच्च मकाम तक पहुंचा सकता है और चाहे तो खुद को निकृष्ट स्तर तक ले जा सकता है| 


परिंदे और हम 





समझते हैं परिंदे भी,

हमारे प्यार की भाषा|

समझते हैं परिंदे भी,

हमारे प्यार की भाषा|

हर रोज एक नयी उड़ान,

और जीने की नयी आशा|


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पर इंसान हैं जो बदल जाते,

ये कभी भी देते झांसा|

सर्वोत्कृष्ट प्राणी बनकर क्यों न,

दें जीवन की नयी परिभाषा|

जीवन की नयी परिभाषा||

            - कृष्ण कुमार कैवल्य|

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Short-Poem on Humanity in Hindi - "परिंदे और हम" से सम्बंथित शब्दार्थ/भावार्थ -

निकृष्ट - तुच्छ, बुरा, अधम, हीन|

परिंदा - पक्षी, चिड़िया, खग|

झांसा - धोखा, छल|


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