Short-Poem on Grandparents in Hindi - "दादा-दादी"- परिवार को एकीकृत करने के प्रयास के रूप में लिखी गयी एक कविता है|
हमारा देश परिवार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान देता है। सदियों से परिवार की गरिमा हमारे यहां बनी रही है। सामान्यतः परिवार ही सभ्य अथवा असभ्य नागरिक पैदा करता है। क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए यह सर्वप्रथम पाठशाला होता है।
एकल परिवार अमूमन बच्चों के समग्र विकास को नहीं दर्शाता। यदि हम सब चाहते हैं कि बच्चों का समुचित विकास हो, तो इसके लिए संयुक्त परिवार का होना परम आवश्यक है।
"दादा-दादी"
- कृष्ण कुमार कैवल्य|
Short-Poem on Grandparents in Hindi - "दादा-दादी" से संबंधित शब्दार्थ -
*अहम - जरूरी, आवश्यक।
*वहम - भ्रम, झूठा संदेह।
*रमक - तरंग, लहर।
*कुटुंब- परिवार, खानदान।
* तड़ीपार - जिला/प्रदेश/ समाज से निकाला गया (निष्कासित)।
Short-Poem on Grandparents in Hindi - "दादा-दादी" से संबंधित कुछ ख़ास बातें -
यह जरूरी है कि हम संयुक्त परिवार में रहें| परिवार को प्रेम के धागे में पिरोकर रखें| लेकिन आज लोग एकल परिवार को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। इसका नतीजा भी बहुत पीड़ा के रूप में सामने आ रहा है। (संयुक्त परिवार उसी अर्थ में खराब है जब इसके सदस्य ही इसे घून की तरह खा रहे हों। तब उस अवस्था में एकल परिवार के रूप में ही जीवन जीना बेहतर होगा)।
जो नैतिक मूल्य, संस्कार, बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास संयुक्त परिवार में होता है, वह एकल परिवार में संभव नहीं है। यह किसी भी परिवार के लिए सौभाग्य की बात है कि उस परिवार के साथ बड़े-बुजुर्ग अर्थात् दादा-दादी, नाना - नानी आदि सदस्य गण साथ रहते हों।
अतः याद रखें। परिवार का सर्वोत्तम प्रकार "संयुक्त परिवार" ही है। जिस प्रकार विकास से बेहतर 'समग्र विकास' होता है।उसी प्रकार एकल परिवार से बेहतर 'संयुक्त परिवार' होता है।
धन्यवाद।🙏



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