Poem on Social-Site “Explurger” in Hindi

Poem on Social-Site “Explurger” in Hindi – एक  ख़ास कविता है; जो सोशल मीडिया ऐप एक्सप्लरज़र के बारे में बतलाती है| 

 इस ऐप को फ़िल्म एक्टर सोनू सूद जी ने अपने मित्र श्री  जितिन भाटिया के साथ मिलकर लॉन्च किया है|ये ए.आई. (A.I.) पर आधारित बिलकुल नया भारतीय सोशल साईट है| यह साईट पूरे विश्व के लोगों को जोड़ते हुए उन्हें अपने अनुभव, तस्वीरें, वीडियो, ट्रैवल, लाइफ स्टाइल आदि अपलोड करने का अवसर देती है|साथ ही संसार का यह ऐसा पहला सोशल मीडिया है; जो लोगों को इस ऐप से कनेक्ट होने के लिए रिवार्ड्स भी देती है|इसे विस्तार से समझने के लिए आप इससे जुड़ सकते हैं और इसका आनंद उठा सकते हैं| पिछले ही वर्ष यानी 07 जून, 2022  से यह विश्व पटल पर छाया है| और बहुत तेजी से दुनिया भर में लोकप्रिय होता जा रहा है| 

 एक्सप्लरज़र 

एक ख़ास सोशल साईट,

नाम इसका एक्सप्लरज़र |

है बड़ी अनोखी

पहुँच इसका घर-घर|

 

Image by Kohji Asakawa from Pixabay


जिस पर ये आधारित,

वह है ए. आई.(A.I.)|

अपने गुणों के कारण

हर ओर है छाई|


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भारत में ये जन्मा

संसार के लिए|

कुछ नहीं बुराई

सपरिवार के लिए|

 

 लोगों को यह जोड़ती

ईनाम देती है|

हर ख़ास व आम को भी

 नाम देती है|


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“यहाँ नहीं तो सोशल नहीं”

इसका मोटो|

यहाँ सबसे ख़ास

“सोनू जी” का फोटो|


Image by Gerd Altmann from Pixabay


भविष्य इसका उज्ज्वल

देते आशीष हरिहर|

{दुनिया में फैला

 ये एक्सप्लरज़र|}-2

                                        ***कृष्ण कुमार कैवल्य***

 

Poem on Social-Site “Explurger” in Hindi से जुड़े शब्दार्थ -

· सपरिवार – पूरा परिवार|

· मोटो – आदर्श उक्ति, नीति वाक्य, आदर्श वाक्य|

· सोनू जी अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सूद जी|

· हरिहर भगवान का एक नाम|

 

Poem on Social-Site “Explurger” in Hindi में उपयुक्त कुछ शब्दों का विस्तृत विवरण-

· A I – इसका फुल फॉर्म Artificial Intelligence (कृत्रिम बुद्धिमता) है| दरअसल A I सोंचने-समझने और फैसला लेने की एक आधुनिक एवं अद्भुत मशीनी व्यवस्था है|

A I की शुरुआत 1950 के दशक में हुई जो 1970 के दशक में स्पष्ट रूप से स्थापित हो गया| यह एक क्रांतिकारी तकनीक है; जिसका सही इस्तेमाल दुनिया को काफ़ी आगे ले जाएगा|

· हरिहर – हरि अर्थात् श्री विष्णु तथा हर अर्थात् भगवान् शिव| इन दोनों के मिश्रित रूप को हरिहर के नाम से जाना जाता है| इन दोनों रूपों के सम्मिलन के कारण वैष्णव एवं शैव दोनों मतों में हरिहर जी बहुत ही पूजनीय हैं| हरिहर जी को शंकरनारायण अथवा शिव-केशव नाम से भी जाना जाता है| हरिहर जी मंदिर बदराना गाँव, उदयपुर, राजस्थान में है| इसका निर्माता अकबर के समकालीन चित्तौड़ के महा प्रतापी अजेय शासक महाराणा प्रताप को माना जाता है|

इसके अलावे बिहार के सारण जिले में स्थित सोनपुर क्षेत्र में( गंडक नदी के तट पर) हरिहर नाथ जी का काफ़ी पुराना मंदिर है| यही पर यानी हरिहर क्षेत्र में पशु मेला हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को (नवम्बर-दिसंबर) लगता है| यह मेला एक माह तक लगता है|  यह पशु मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है| समय बदलने के साथ- साथ यह मेला केवल पशु मेला तक सीमित नहीं रह गया है| बल्कि इसका रूप बहुआयामी हो चला है, जो काफ़ी सकारात्मक साबित हो रहा है| इसमें सरकार का निःसंदेह बहुत बड़ा योगदान है|

 

 

 

 

 

 

 

 

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