Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi

Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi – “सबके चहेते तुम बन जाना” एक प्रेरणादायी कविता है|

 यह कविता एक माँ का अपने बच्चे के प्रति वात्सल्य एवं भावनात्मक लगाव को रखांकित करती है| साथ एक देशभक्त व सच्चा इंसान बनने की सीख भी देती है|




“सबके चहेते तुम बन जाना”


तू सार्थक है तू समर्थ है,

इस जीवन का ख़ास अर्थ है|

ज़िंदगी अनमोल बड़ी है,

समझे नहीं तुम तो ये व्यर्थ है|

इस जीवन का ख़ास अर्थ है|

इस जीवन का ख़ास अर्थ है|


सर्वस्व त्याग इस मात-पिता ने,

तुझको बड़े है नाज़ से पाला|

तेरी हर ख़ुशी की खातिर,

खुद को ही अर्पित कर डाला|

तुझको बड़े है नाज़ से पाला|

तुझको बड़े है नाज़ से पाला|

 

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हार न जाना इस जग से तुम,

संघर्ष ही है जीवन का गहना|

हृदय-दीपक से तम को हरकर,

सदा बसंत बनकर तुम बहना| 

संघर्ष ही है जीवन का गहना|

संघर्ष ही है जीवन का गहना|


 

इंसान धरा पे कोई भी हो, 

कर्ज देश का होता बड़ा है|

उसे चुकाना भूल न जाना,

मर्ज - वेश ले होता खड़ा है|

कर्ज देश का होता बड़ा है|

कर्ज देश का होता बड़ा है|

 

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कुछ भी करना तुम ये सोंचकर,

तेरे कदम से न कोई आहत हो|

हर दुर्गुण से दूर ही रहना,

किसी अवांछित की न चाहत हो|

तेरे कदम से न कोई आहत हो|

तेरे कदम से न कोई आहत हो|

 

Image by:Yan Krukau from: pexels.com

 

अपने कर्म से पूरे इस जग में ,

सबके चहेते तुम बन जाना|

यदि पुनर्जनम है होता,

तो मम पुत्र पुनः बन आना|

सबके चहेते तुम बन जाना|

सबके चहेते तुम बन जाना|

-कृष्ण कुमार कैवल्य| 

 

Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi – “सबके चहेते तुम बन जाना” से जुड़े शब्दार्थ/भावार्थ


. वात्सल्य - प्रेम एवं स्नेह जो एक माता-पिता को अपने बच्चे के प्रति रहता है|

२. सर्वस्व - सब कुछ|

3. नाज़ -  गर्व, अभिमान (Pride)|

४. अर्पित - न्यौछावर कर देना, समर्पित करना|

५. जीवन का गहना - जीवन को सुंदर  बनाने के अर्थ में|

६. बसंत बन कर बहना - मनोहारी, पीड़ाहारी, आनंदस्वरूप बनकर रहना|

७. धरा - धरती|

८. मर्ज - बीमारी, रोग|

९. आहत - चोटिल, घायल|

१०. अवांछित - अनचाहा ( ख़राब या बुरे के अर्थ में)|

११. मम - मेरा|

१२. पुनर्जन्म - फिर से जन्म|


 Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi  “सबके चहेते तुम बन जाना” - 

 इस कविता के माध्यम से मैं यह कहने चाहता हूँ कि बच्चे माँ-बाप के लिए सब कुछ होते हैं| वे अपना तन, मन व धन सब कुछ अपनी संतान के लिए अर्पित कर देते हैं| इसके बदले वे बच्चों से सिर्फ प्यार की अपेक्षा रखते हैं| निःसंदेह वृद्धावस्था में बच्चे अवश्य ही उनकी लाठी बनें| यही इंसानियत भी है और संतान का फर्ज भी|

धन्यवाद|



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