Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi – “सबके चहेते तुम बन जाना” एक प्रेरणादायी कविता है|
यह कविता एक माँ का अपने बच्चे के प्रति वात्सल्य एवं भावनात्मक लगाव को रखांकित करती है| साथ एक देशभक्त व सच्चा इंसान बनने की सीख भी देती है|
“सबके चहेते तुम बन जाना”
तू सार्थक है तू समर्थ है,
इस जीवन का ख़ास अर्थ है|
ज़िंदगी अनमोल बड़ी है,
समझे नहीं तुम तो ये व्यर्थ
है|
इस जीवन का ख़ास अर्थ है|
इस जीवन का ख़ास अर्थ है|
सर्वस्व त्याग इस मात-पिता ने,
तुझको बड़े है नाज़ से पाला|
तेरी हर ख़ुशी की खातिर,
खुद को ही अर्पित कर डाला|
तुझको बड़े है नाज़ से पाला|
तुझको बड़े है नाज़ से पाला|
हार न जाना इस जग से तुम,
संघर्ष ही है जीवन का गहना|
हृदय-दीपक से तम को हरकर,
सदा बसंत बनकर तुम बहना|
संघर्ष ही है जीवन का गहना|
संघर्ष ही है जीवन का गहना|
इंसान धरा पे कोई भी हो,
कर्ज देश का होता बड़ा है|
उसे चुकाना भूल न जाना,
मर्ज - वेश ले होता खड़ा है|
कर्ज देश का होता बड़ा है|
कर्ज देश का होता बड़ा है|
कुछ भी करना तुम ये सोंचकर,
तेरे कदम से न कोई आहत हो|
हर दुर्गुण से दूर ही रहना,
किसी अवांछित की न चाहत हो|
तेरे कदम से न कोई आहत हो|
तेरे कदम से न कोई आहत हो|
अपने कर्म से पूरे इस जग में ,
सबके चहेते तुम बन जाना|
यदि पुनर्जनम है होता,
तो मम पुत्र पुनः बन आना|
सबके चहेते तुम बन जाना|
सबके चहेते तुम बन जाना|
-कृष्ण कुमार कैवल्य|
Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi – “सबके चहेते तुम बन जाना” से जुड़े शब्दार्थ/भावार्थ
१. वात्सल्य - प्रेम एवं स्नेह जो एक माता-पिता को अपने बच्चे के प्रति रहता है|
२. सर्वस्व - सब कुछ|
3. नाज़ - गर्व, अभिमान (Pride)|
४. अर्पित - न्यौछावर कर देना, समर्पित करना|
५. जीवन का गहना - जीवन को सुंदर बनाने के अर्थ में|
६. बसंत बन कर बहना - मनोहारी, पीड़ाहारी, आनंदस्वरूप बनकर रहना|
७. धरा - धरती|
८. मर्ज - बीमारी, रोग|
९. आहत - चोटिल, घायल|
१०. अवांछित - अनचाहा ( ख़राब या बुरे के अर्थ में)|
११. मम - मेरा|
१२. पुनर्जन्म - फिर से जन्म|
Motivational-Inspirational Poem for Children in Hindi “सबके चहेते तुम बन जाना” -
इस कविता के माध्यम से मैं यह कहने चाहता हूँ कि बच्चे माँ-बाप के लिए सब कुछ होते हैं| वे अपना तन, मन व धन सब कुछ अपनी संतान के लिए अर्पित कर देते हैं| इसके बदले वे बच्चों से सिर्फ प्यार की अपेक्षा रखते हैं| निःसंदेह वृद्धावस्था में बच्चे अवश्य ही उनकी लाठी बनें| यही इंसानियत भी है और संतान का फर्ज भी|
धन्यवाद|



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