Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi.
Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi-
अधिकांश व्यक्ति अपने जीवन में सही निर्णय नहीं ले पाते| क्योंकि उनका फैसला
तार्किक एवं वैज्ञानिक न होकर भावना-प्रधान होता है| नतीजा असफलता हाथ लगती
है| अतः हमें निर्णय अंतःकरण की आवाज़ पर लेना चाहिए, जो वस्तुनिष्ठ व प्रगतिशील भी
हो|
सवारी
दो नाव की
होता बड़ा ही घातक है
सवारी दो नाव की|
ऐसा लोग इसलिए हैं करते
आशा होती है छाँव की|
{सवारी दो नाव की}|2
एक न मिला तो दूजा मिलेगा,
मन को वे बहलाते हैं|
होता नहीं है कुछ ऐसा पर
नईया दोनों डूब जाते हैं|
{मन को वे बहलाते हैं}|2
कहा रहीम ने था एक दिन,
‘एक’ साधे तो सब मिल जाए|
साधे गए ‘सब कुछ’ अगर तो
कुछ भी न मिल पाए|
{एक साधे तो सब मिल जाए}|2
करते किन्तु हम इसे अनसुना,
सिद्ध की गयी बातों को|
रोते बहुत हैं भविष्य में हम
अनंत दिन और रातों को|
{सिद्ध की गयी बातों को}|-2
विपरीत-व्यंजन बनता जब एक में
गुड़-गोबर हो
जाता है|
रहता नहीं खाने लायक तब,
किसको भला वो भाता है|
{गुड़-गोबर हो जाता है}|-2
एक समझने की न भूल कर,
सच और झूठ के नाव को|
झूठ दलदल है कदम न रख तू,
दूषित मत कर पांव को|
{सच और झूठ के नाव को}|-2
पथभ्रष्ट कई मिलेंगे चेहरे,
तुम पर असर वो डालेंगे|
विषधर को खुद से दूर रखकर
तुम्हारे गले में पालेंगे|
{तुम पर असर वो डालेंगे}|-2
अतः किसी निर्णय से पहले,
सभी पक्षों को जान लो तुम|
अपने अंतर्मन की आवाज़ को
आखिरकार मान लो तुम|
अपने अंतर्मन की आवाज़ को
आखिरकार मान लो तुम|
- कृष्ण
कुमार कैवल्य|
Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi से जुड़े कुछ शब्दार्थ/भावार्थ –
घातक – नुकसान पहुंचाने वाला, खतरनाक|
कश्ती – नाव|
छांव – छाया, आरामदायक, सुखदायी, (यहाँ दूसरे विकल्प की प्राप्ति के अर्थ में)|
रहीम – महान विद्वान अब्दुल
रहीम खानखाना(अकबर के नवरत्नों में एक)|
अनसुना –ध्यान न देना|
व्यंजन – किस्म-किस्म
के भोज्य पदार्थ|
पथभ्रष्ट चेहरे –
गलत/बुरे लोग|
विषधर –
खराब/नुकसानदायी चीजें, गरिमा को आहत करने वाली वस्तुएँ|
वस्तुनिष्ठ
– तार्किक|
सच का नाव – निश्चित बात/राह|
झूठ का नाव – अनिश्चित बात/मार्ग|
“सच
और झूठ के नाव को” - संस्कृत की एक बहुत पुरानी सुक्ति
के हिंदी अर्थ से इस वाक्य का भावार्थ बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगा, जो इस प्रकार है –
जो व्यक्ति निश्चित को छोड़कर अनिश्चत की ओर जाता है, उसके अनिश्चित का तो नाश होता ही है, निश्चित भी नष्ट हो जाता है|


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