Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi

 

Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi.

Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi- अधिकांश व्यक्ति अपने जीवन में सही निर्णय नहीं ले पाते| क्योंकि उनका फैसला तार्किक एवं वैज्ञानिक न होकर भावना-प्रधान होता है| नतीजा असफलता हाथ लगती है| अतः हमें निर्णय अंतःकरण की आवाज़ पर लेना चाहिए, जो वस्तुनिष्ठ व प्रगतिशील भी हो|

 

सवारी दो नाव की
 

होता बड़ा ही घातक है

सवारी दो नाव की|

ऐसा लोग इसलिए हैं करते

आशा होती है छाँव की|

{सवारी दो नाव की}|2


 

Image by Quang Nguyen vinh from Pixabay


एक न मिला तो दूजा मिलेगा,

मन को वे बहलाते हैं|

होता नहीं है कुछ ऐसा पर

नईया दोनों डूब जाते हैं|

{मन को वे बहलाते हैं}|2

 

कहा रहीम ने था एक दिन,

‘एक’ साधे तो सब  मिल जाए|

साधे गए ‘सब कुछ’ अगर तो

कुछ भी न मिल पाए|

{एक साधे तो सब  मिल जाए}|2

 

करते किन्तु हम इसे अनसुना,

सिद्ध की गयी बातों को|

रोते बहुत हैं भविष्य में हम

अनंत दिन और रातों को|

{सिद्ध की गयी बातों को}|-2


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विपरीत-व्यंजन बनता जब एक में

गुड़-गोबर हो जाता है|

रहता नहीं खाने लायक तब,

किसको भला वो भाता है|

{गुड़-गोबर हो जाता है}|-2

 

एक समझने की न भूल कर,

सच और झूठ के नाव को|

झूठ दलदल है कदम न रख तू,

दूषित मत कर पांव को|

{सच और झूठ के नाव को}|-2

 

पथभ्रष्ट कई मिलेंगे चेहरे,

तुम पर असर वो डालेंगे|

विषधर को खुद से दूर रखकर

तुम्हारे गले में पालेंगे|

{तुम पर असर वो डालेंगे}|-2



Image by Stefan Keller from Pixabay


अतः किसी निर्णय से पहले,

सभी पक्षों को जान लो तुम|

अपने अंतर्मन की आवाज़ को

आखिरकार मान लो तुम|

अपने अंतर्मन की आवाज़ को

आखिरकार मान लो तुम|

-   कृष्ण कुमार कैवल्य|

 

Motivational/Inspirational Poem on “Right Decision” in Hindi से जुड़े कुछ शब्दार्थ/भावार्थ –

घातक – नुकसान पहुंचाने वाला, खतरनाक|

कश्ती – नाव|

छांव – छाया, आरामदायक, सुखदायी, (यहाँ दूसरे विकल्प की प्राप्ति के अर्थ में)|

रहीम – महान विद्वान अब्दुल रहीम खानखाना(अकबर के नवरत्नों में एक)|

अनसुना –ध्यान न देना|

व्यंजन – किस्म-किस्म के भोज्य पदार्थ|

पथभ्रष्ट चेहरे – गलत/बुरे लोग|

विषधर – खराब/नुकसानदायी चीजें, गरिमा को आहत करने वाली वस्तुएँ|

वस्तुनिष्ठ – तार्किक|

सच का नाव – निश्चित बात/राह|

झूठ का नाव – अनिश्चित बात/मार्ग|

“सच और झूठ के नाव को” - संस्कृत की एक बहुत पुरानी सुक्ति के हिंदी अर्थ से इस वाक्य का भावार्थ बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगा, जो इस प्रकार है –

जो व्यक्ति निश्चित को छोड़कर अनिश्चत की ओर जाता है, उसके अनिश्चित का तो नाश होता ही है, निश्चित भी नष्ट हो जाता है|



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