Desh-Bhakti Kavita in Hindi/भारतीय-स्वतंत्रता पर कविता – भारत के अतीत में झाँकते हुए इसके वर्तमान को व्यक्त करती कविता है| हमारा देश अंग्रेजों की लम्बी गुलामी से पश्चात आज़ाद हुआ| हमारी ये स्वतंत्रता लाखों लोगों की शहादत के पश्चात मिली है| पर क्या हमने उनके बलिदान को याद रखा है? क्या हम उनके द्वारा स्थापित मानदंडों को ध्वस्त नहीं कर रहे हैं?
अगर किसी से आज यह पूछा जाए कि क्या आप अपने घर में एक क्रांतिकारी का उदय होते देखना चाहेंगे? ज़वाब क्या मिलेगा, ये हर व्यक्ति अपने आप से पूछे| निश्चित ही कुछ अपवादों को छोड़कर ज़वाब एक सा ही मिलेगा, जो नकारात्मक होगा|
आज़ादी के मतवालों ने हमारे आज के लिए अपने कल को कुर्बान कर दिया| हम अपनी बहुमूल्य स्वतंत्रता को कायम रखने की हर संभव ईमानदार कोशिश करें| यही उन सभी वीरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी| “जय हिन्द”|
‘भारतीय स्वत्रंत्रता’
कुछ लुटेरे पश्चिम से आए,
विक्रेता बन भारत में आए|
रुप बदल बन गए वे शासक,
पूरी भारत-भूमि पर छाए|
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दो सौ साल चला शासन उनका,
कुछ भी न था यहाँ पर उनका|
आधुनिक शासन के नाम पर,
चूसा खून उन्होंने जन का|
गाँधी, सुभाष, भगत जब आए,
पाँव अंग्रेजों के लड़खड़ाए|
ऐसी उखड़ी नींव यहाँ उनकी,
तनिक चली नहीं यहाँ उनकी|
सपूतों ने खदेड़ा उनको,
टेम्स के तट पर भेजा उनको|
अपनी ताकत का भान कराया,
हिन्द का सम्मान बढ़ाया|
पर गोरों ने विष-बीज बोया था,
फलस्वरूप देश खूब रोया था|
बँटवारा वे देश का कर गए,
घाव दे अपने घर वे गए|
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थे वे देश को चरने वाले,
प्राण लोगों के हरने वाले|
साम्राज्यवाद के वे प्रतीक थे,
इंसान तो नहीं वे पीक थे|
जात-धर्म आदि के नाम पर,
अब कुछ लोगों ने भाग्य चमकाया|
सत्ता-लोलुपता के कारण,
हर हथकंडा उन्होंने अपनाया|
ऐसे ही लोगों के कारण,
हम सब बड़े खतरे में हैं|
खुद को कर रखा है सुरक्षित,
जीते आम जन ‘कतरे’ में हैं|
इसलिए समाज को फिर है ज़रूरत,
अशफ़ाक, बिस्मिल, आज़ाद की|
गाँधी, नेहरु और तिलक की,
मौलाना आज़ाद की|
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राष्ट्र-प्रेम है सबसे ज़रूरी,
व्यवस्था में विश्वास ज़रूरी|
मूल्य के बिना देश चल नहीं सकता,
बिन इनके सब अधूरी|
बिन इनके सब अधूरी|
***कृष्ण कुमार कैवल्य***|
Desh-Bhakti Kavita in Hindi/भारतीय-स्वतंत्रता पर कविता से संबंधित शब्दार्थ/भावार्थ –
अतीत – भूतकाल, बीता हुआ समय|
अपवाद – विरल उदाहरण(exception)|
पश्चिम – यूरोपीय देशों के लिए उपमा (खासकर ब्रिटेन के लिए)|
लुटेरे – साम्राज्यवादी ताकतों के लिए प्रयुक्त|
विक्रेता – व्यापारी|
सुभाष – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस|
भगत – शहीद-ए-आजम भगत सिंह|
नींव उखड़ना – सत्ता समाप्त होना, जड़ से ख़त्म हो जाना|
सपूत – सभी देशभक्तों के लिए प्रयुक्त|
टेम्स के तट पर भेजना – ब्रिटेन वापस भेजने के अर्थ में (टेम्स एक नदी है, जिसके तट पर लंदन शहर स्थित है)|
भान कराना – प्रभावकारी असर दिखलाना, एहसास कराना|
हिन्द – भारत, हिन्दुस्तान|
गोरे – अंग्रेज|
विष-बीज – साम्प्रदायिकता के अर्थ में यह शब्द प्रयुक्त|
फलस्वरूप – परिणामस्वरूप|
घाव देना – दुःख-दर्द देना|
अपने घर गए – यहाँ ‘घर’ शब्द संयुक्त राज्य ग्रेट ब्रिटेन के लिए प्रयुक्त|
देश को चरना – देश को लुटना|
पीक – थूक|
कतरा – टुकड़ा (यहाँ किसी तरह ज़िन्दगी बचाए रखने के अर्थ में)|
अशफ़ाक – महान क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खां|
बिस्मिल – कवि तथा महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल|
आज़ाद – महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद|
तिलक – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक|
मौलाना आज़ाद – मौलाना अबुल कलाम आज़ाद|
(कविता में कुछ भारतीय महापुरुषों के नामों का उल्लेख किया गया है| इसका अर्थ ये एवं इन जैसे देशभक्तों की बहुत ज़रूरत हमारे देश को है)|
व्यवस्था – भारतीय राजनीतिक व्यवस्था (Indian political system)|
मूल्य – मानवीय मूल्यों के लिए प्रयुक्त (इंसानियत के गुण)|
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