Motivational-Inspirational Poem in Hindi – “तेरे सपने” ——> सपने तो सभी लोग देखते हैं| परन्तु बंद आँखों के सपनों का कोई अर्थ नहीं| सपने तो वे हैं जो हम खुली आँखों से देखते हैं| ऐसे सपनों को साकार करने में हमें अपनी अनंत शक्ति लगा देनी चाहिए| अगर हम ऐसा करते हैं; तो प्राकृतिक शक्तियाँ भी हमारी मदद करती हैं और हम अपने सपनों को अवश्य पूरा कर पाते हैं| कुछ ऐसी ही व्यावहारिक एवं प्रेरक बातों को इस कविता में व्यक्त किया गया है|
तेरे सपने
खुली आँखों से देख तू सपने,
असली यही होते हैं|
बंद आँखों के देखे सपने,
पल भर में खोते हैं|
सपने हैं यदि तेरे तो,
इसके लिए कुछ कर जाना|
सबसे बुरा होता है यहाँ,
सपनों का किसी के मर जाना|
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सपने छोटे हों या बड़े,
देते हैं ये बल|
इन पर हीं टिका होता है,
आने वाला कल|
अगर नहीं करेगा पूरा,
तू अपने सपनों को|
लग जाएगा पूरा करने में,
दूजे के सपनों को|
बहुत ख़ूब जानते कई हैं,
दूसरों का इस्तेमाल|
धोखे में रखकर लोगों को,
बन जाते हैं मालामाल|
ग़ैरों को छोड़ ही दो अब,
ले लो तुम अपनों को|
रौंद देते तेरे ये अपने,
पूरे हो रहे सपनों को|
अतः सचेत रहो अपनों से,
पराया क्या ले जाएगा?
तेरी सफ़लता की ख़बर से,
खींचा वो चला आएगा|
हो जाए पूरे जब सपने,
तब भी सबका सम्मान करो|
उड़ो तुम भले आकाश में,
धरती का गुणगान करो|
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सपने तो सपने होते हैं,
कई बार ये टूटते हैं|
देखा है मैंने कईयों को,
रोज़-रोज़ वे घुटते हैं|
पर होता नहीं कभी ये अच्छा,
जीत या हार स्वीकार करो|
टूट जाए अगर एक सपना.
दूजे को साकार करो|
मनोनुकूल न मिले तो,
मायूस कभी न होना|
वातानुकूल यहाँ कुछ नहीं,
धीरज कभी न खोना|
एक रौशनी दूर भगाए,
सपनों के अंधियारों को|
गर्दिश से भी खींच के लाए,
तेरी किस्मत के तारों को|
जब तक ज़िन्दगी चलती रहेगी,
सपने देखना बंद नहीं करना|
सारी दूरियां सिमटती रहेंगी,
लम्बे सफ़र से तुम नहीं डरना|
सच आभासी दिखते रहेंगे,
सोते रहे अगर तुम|
प्राण-पण से जुट गये गर तो,
सपनों को वर लोगे तुम|
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अंतरिक्ष का अंत नहीं है,
तेरे उड़ान की नहीं कोई रेखा|
अपने को कभी कम मत आँको,
समझ ले तू अभी कुछ नहीं देखा|
इसलिए,
मेहनत की हर सीमा से,
बहुत आगे तू निकल जा|
कोई तुझको छू न सके,
तू इतनी दूर निकल जा|
कोई तुझको छू न सके,
तू इतनी दूर निकल जा|
—कृष्ण कुमार कैवल्य---
Motivational-Inspirational Poem in Hindi – “तेरे सपने” से जुड़े शब्दार्थ –
मनोनुकूल – मन के अनुसार, मन के अनुकूल|
गर्दिश – संकट, मुसीबत, आफ़त का समय|
प्राण-पण से जुटना – किसी काम में पूरे मन से लग जाना, पूर्ण समर्पित होकर कोई काम करना|
आभासी सच – सच जैसा दिखने वाला दृश्य (जो वास्तव में सच नहीं होता)|
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