Poem on Teachers' Day in Hindi - "शिक्षक दिवस" एक गंभीर कविता है| जो शिक्षक-विद्यार्थी संबंध एवं आज की वास्तविकता को बतलाती है|
शिक्षक दिवस कविता के माध्यम से मैंने शिक्षा व गुरु-शिष्य के स्याह सच को उद्घाटित करते हुए यह बताने की कोशिश की है कि कैसे हम पुनः उत्कृष्ट (आदर्श) स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं|
शिक्षक-दिवस
हैं कहते इसे शिक्षक दिवस,
भले विद्यार्थी इसे जानते हैं।
हैं कहते इसे शिक्षक दिवस,
भले विद्यार्थी इसे जानते हैं।
है दर्जा गुरु का सबसे ऊपर,
क्या सच में छात्र इसे मानते हैं?
व्यावसायिक शिक्षा के इस दौर में,
बहुत ही गिर चुका है मूल्य।
पर रहे स्मरण यह बात तुम्हें
होते हैं गुरु पिता, ईश तुल्य।
Must read an another Motivational Poem on "Teachers' Day"
पहले मूल्यों पर बहुत जोर था,
शिक्षा का उद्देश्य था चरित्र- निर्माण।
हावी आज भौतिकता शिक्षा पर,
बात बहुत दूर की है निर्वाण।
अवस्था मोक्ष/ निर्वाण /कैवल्य की,
होती है कालातीत।
नैतिक पतन के तीव्र होने से,
ये लगने लगा अतीत।
हैं बनना चाहते ध्रुव तारा तो,
गुरु को सर्वोच्च स्थान दें।
सच्चे दिल से शिक्षा ले उनसे,
उनको परम सम्मान दें।
और,
न बने औपचारिकता शिक्षक दिवस,
आओ हम यह आह्वान करें|
न बने औपचारिकता शिक्षक दिवस,
आओ हम यह आह्वान करें|
शुरू करें गुरु शिष्य- परंपरा,
शिक्षा पर संधान करें।
शिक्षा पर संधान करें।
- कृष्ण कुमार कैवल्य।


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